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अमरीका से आए दूूल्हे के लिए घोड़ी पर सवार होकर पहुंची दुल्हन

- अनोखी बारात- 300 साल पुरानी गुजराती समाज की परंपरा को फिर किया जीवित

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The bride arrived on a mare for the bridegroom from America

The bride arrived on a mare for the bridegroom from America

बुरहानपुर. अमरीका से आए दूल्हे के लिए दुल्हन घोड़ी पर सवार होकर बारात लेकर पहुंची। जब दुल्हन बनी अंशुल मुंशी घोड़ी पर बैठकर बारातियों के संग शहर में निकली तो देखने वाले देखते रह गए। शाह बाजार शनि मंदिर के पास से निकली बारात प्रमुख मार्गों से होते हुए प्रतापपुरा लक्ष्मी विलास भवन पहुंची। गुजराती समाज की ३०० साल पुरानी कन्या घाटरी परंपरा के अनुसार दूल्हन ने शादी से पहले दूल्हे वालों को यह आमंत्रण दिया।
डेंटिस्ट डॉक्टर अंशुल पिता ओम मंशी का विवाह अमेरीका में एप्पल कंपनी में इंजीनियर नेपानगर निवासी अपेक्षित पिता विजय शाह के साथ होने जा रहा है। गुजराती मोढ़ वणिक समाज की ३०० साल पुरानी कन्या घाटरी परंपरा को फिर से जीवित करने के लिए सोमवार को दूल्हन घोड़े पर सवार होकर बारातियों के साथ विवाह स्थल तक पहुंची। समाज के रिती रिवाज और विधि विधान से शादी का निमंत्रण दिया। गुजराती समाज के अध्यक्ष कमलेश शाह ने बताया कि समाज में घाटरी परंपरा 300 साल पुरानी है। कुछ समय से यह परंपरा बंद होने के बाद अब फिर से समाज ने दोबारा शुरू किया है। समाज ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ और बेटी बढ़ाओ को लेकर यह परंपरा फिर से शुरू की है। इस पुरानी परंपरा को समाज भी स्वीकार कर रहा है। दुल्हन की बारात में समाज के लोग भी बैंड बाजे की धून पर डांस करते हुए नजर आए। कन्या घाटरी के बाद माता पूजन कार्यक्रम हुआ।
कपड़े के थैली और रूमाल पर छपवाई निमंत्रण पत्रिका
विवाह की पत्रिका आमतौर पर कागज पर छपती है, शादी के बाद में फेंक दिया जाता है। इस लिए इस विवाह में कॉटन की थैली और कपड़े के रूमाल को आमंत्रण पत्रिका का रूप दिया गया। इससे कागज की बचत होगी। दो.तीन बार धुलने पर यह रूमाल लोगों के काम भी आएगा। शादी में ऐसी एक हजार पत्रिकाएं छपवाई हैं। कॉटन की थैली पर विवाह निमंत्रण शुभ विवाह लिखा है, वहीं थैली के अंदर रूमाल पर विवाह समारोह का पूरा विवरण दिया गया। नीचे प्लास्टिक और कागज का उपयोग कम करने तथा अधिक से अधिक पौधरोपण करने की अपील की गई है। दूल्हे के पिता विजय शाह के अनुसार आमजन में प्लास्टिक का उपयोग खत्म करने के लिए ऐसे प्रयास बहुत जरूरी है। वर्तमान समय में सरकार भी पेपरलेस वर्क पर जोर दे रही है। इससे हमारा पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा।