
Watch video: Holy Amarnath Yatra was thrilling
बुरहानपुर. आस्मां को छूते देवदार के हरे पेड़, कल.कल बहती नदियां, बर्फ से ढकी चोटियां, ग्लेशियर के नीचे से निकली पतली जलधारा जहां किसी को भी मोह ले, वहीं पथरीले पहाड़ की ढलान पर बने रास्ता और उसके नीचे गहरी खायी, जो डराती कम रोमांच ज्यादा पैदा करती है, इस तरह के प्राकृतिक दृश्यों को अपने दामन में समेटे अगर कोई यात्रा या स्थान है तो वह समुद्रतल से करीब 3978 मीटर की ऊंचाई पर स्थित श्री अमरनाथ की पवित्र गुफा की तीर्थयात्रा।
यह प्राकृतिक नजारा और पवित्र गुफा के दर्शन कर बुरहानपुर लौटे भक्तों ने अपने अनुभव बताए। यह वही पौराणिक गुफा है, जहां भगवान शिव ने देवी पार्वती को अमरत्व की कहानी सुनायी थी। कहानी सुनते सुनते देवी पार्वती सो गईं और कबूतरों के एक जोड़े ने कथा को सुन अमरत्व प्राप्त किया। हर वर्ष श्रावण मास के दौरान देश.विदेश से हजारों की तादाद में श्रद्धालु पवित्र गुफा में हिमलिंग स्वरुप में विराजमान होने वाले शिव.पार्वती और भगवान गणेश के दर्शन के लिए पहुंचने लगे हैं।
बुरहानपुर से दर्शन को गए मनोज शंखपाल, प्रवीण शहाणे, सुदामा मोरे, सुभाष चौधरी, चंदुमल छाबडिय़ा, राकेश सोमवंशी ने बताया कि बालटाल से 14 किमी का सफर तय कर जब पवित्र गुफा तक पहुंचे तो यहां एक एक सीढ़ी चढऩा मुश्किल था, लेकिन जैसे ही बाबा बर्फानी के दर्शन हुए मोनो बाबा भोले ने सारे कष्ट हर लिए। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा बदलाव यह देखने में आया कि धारा 370 हटने के बाद यहां यात्रा को सुगम बनाया जा रहा है।
एक जुलाई से अमरनाथ यात्रा आरंभ
पवित्र गुफा की वार्षिक तीर्थयात्रा इस साल 1 जुलाई से शुरू होकर 31 अगस्त तक चलेगी। दो मुख्य आधार शिविर बालटाल और पहलगाम में हैं। बालटाल श्रीनगर.लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर जोजिला दर्रे के दामन में स्थित है, जबकि पहलगाम दक्षिण कश्मीर में लिद्दर दरिया किनारे बसा एक गांव है। बालटाल से करीब 14 किमी की यात्रा कर पवित्र गुफा पहुंचा जा सकता है। यह रास्ता अत्यंत कठिन है। जबकि पहलगाम से पवित्र गुफा की दूरी 48 किमी है।
यह घाटी सबसे कठिन
पवित्र गुफा की तरफ जाने वाला उत्तरी रास्ता जोजिला दर्रे के दामन में स्थित बालटाल से शुरू होता है। बालटाल से पवित्र गुफा की दूरी मात्र 14 किमी है। रास्ते में दोमेल, बरारीमर्ग है, लेकिन यह रास्ता पथरीले और गंजे पहाड़ों से गुजरता है। रास्ते में नदी भी है, जो अमरनाथ ग्लेशियर से जुड़ी है। भूस्खलन और आक्सीजन की कमी यहां अक्सर श्रद्धालुओं के लिए मुश्किल पैदा करती है। इस मार्ग से एक दिन में यात्रा संपन्न की जा सकती है। जगह जगह यहां चेतावनी बोर्ड लगे हैं। सबसे कठिन घाटी संगम टॉप की घाटी है। जहां पहलगाम और बालटाल वाले रास्ते एक साथ मिलते हैं। यहां घोड़े और पालकी से भी आप जा रहे हैं, तो संगम टॉप वाला रास्ता इतना कठिना है कि यहां दो किमी पैदल ही चलना होगा।
पहलगाम वाले कठिन रास्ते
पहलगाम से आप यात्रा पर निकले हैं, तो पिस्सु टाप पथरीला रास्ता और खड़े पहाड़ों के बीच अगला पड़ाव पिस्सु घाटी है। चंदनबाड़ी से करीब चार किमी की दूरी पर समुद्रतल से करीब 11500 फीट की ऊंचाई पर स्थित पिस्सु घाटी के शिखर पर खड़े पहाड़ को पिस्सु टाप कहते हैं।
यात्रा एक नजर में
जम्मू.कश्मीर सरकार ने दो महीने तक चलने वाली यात्रा के लिए अचूक सुरक्षा व्यवस्था की है
बाबा बर्फानी का शिवलिंग श्रीनगर से 135 किलोमीटर दूर है।
यात्रा को आरामदायक और सुखद अनुभव बनाने के लिए यात्रियों की सुरक्षित आवाजाही और ठहरने के लिए प्रशासन जबरदस्त इंतजाम किया गया है।
सुबह 4 बजे से चढ़ाव के लिए दर्शन यात्रा के लिए होता है प्रस्थान
5 बजे डोमोल गेट से छूटते ही यात्री
सुबह 9 बजे के बाद यात्रा की अनुमति नहीं
पहली बार यह सुविधा मिली
कच्चे रोड 12 फीट चौड़े कर दिए गए
बेस कैंप से लेकर गुफा तक बिजली की व्यवस्था, जगह जगह स्ट्रीट लाइट
पूरे रोड पर सुरक्षा के लिए रेलिंग
खच्चर, पालकी और हेलीकॉप्टर का सरकारी दर के टिकट तय
पहली बार यात्रियों को आरएफआईडी कार्ड
Published on:
09 Jul 2023 01:50 pm
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