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धरोहरों पर सर्दी बेअसर, नहीं आ रहे फ्रांस, बेल्जियम, जर्मनी, इंगलेंड, स्विजरलैंड के पर्यटक

- विदेशी पर्यटकों की रौनक फिकी- पर्यटन स्थलों पर दिख रहा सन्नाटा

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Winter has no effect on heritage sites, tourists from France, Belgium, Germany, England and Switzerland are not coming.

Winter has no effect on heritage sites, tourists from France, Belgium, Germany, England and Switzerland are not coming.

बुरहानपुर. पर्यटन नगरी बुरहानपुर में खासकर सर्दी के मौसम में विदेशी पर्यटकों का इंतजार रहता है। लेकिन यह साल सर्दी भी बेअसर है और पर्यटकों की संख्या भी नदारद है। पर्यटन स्थल सूने पड़े हैं। खासतौर पर विदेशी पर्यटकों की आवाजाही बहुत कम हो गई है। पिछले चार साल में धरोहरों पर 50 प्रतिशत भी पर्यटक यहां नहीं पहुंच रहे हैं, विदेशी पर्यटकों की रंगत तो जैसे गायब ही हो गई है। कुछ ही इक्का दुक्का विदेशी बुरहानपुर पहुंच रहे हैं।
शहर के धार्मिक एवं ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों को देखने के लिए हर साल 15 हजार से अधिक पर्यटक पहुंचते थे। छुट्टियों वाले दिन भी पर्यटकों की भीड़ दिखाई देती थी, लेकिन अब असर देखने को नहीं मिला। देश के विभिन्न हिस्सों के साथ ही विदेशों से भी यहां पर्यटक आया करते थे, लेकिन कोरोना के बाद से तो विदेशी पर्यटकों ने भी अपने कदम पीछे कर लिए हंै।
इन देशों से पहुंचते थे विदेशी पर्यटक
जिला पुरातत्व समिति सदस्य होशंग हवलदार ने बताया कि पहले पर्यटन स्थलों पर प्रतिदिन 500 पर्यटक पहुंचे थे। विदेशी पर्यटकों की बात करें तो एक साल में लगभग 900 से एक हजार तक संख्या पहुंचती थी। फ्रांस, बेल्जियम, इंगलेंड, साउथ कोरिया, स्विजरलैंड और जर्मनी सहित अन्य विदेशों से पर्यटक शहर के ऐतिहासिक स्थलों को देखने एवं इतिहास को समझने के लिए पहुंचे थे, लेकिन अभी संख्या बहुत कम हो गई है।
दो जगह लगता है चार्ज
ऐसे तो बुरहानपुर में पर्यटन की दृष्टि से कई धरोहर है, जहां पर्यटन यहां के इतिहास को जान सकते हैं। लेकिन महज दो धरोहरों पर शुल्क देकर एंट्री है। पहला शाही किला जहां जिला पुरातत्व विभाग यहां एंट्री चार्ज रखा है, दूसरा कुंडी भंडारा। इसके अलावा देखने के लिए असीरगढ़, मुमताज महल का आहूखाना सहित कई धरोहर है।

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