केंद्रीय
योजनाओं में केंद्र और राज्य सरकार की हिस्सेदारी को लेकर चल रही बहस
समाप्त हो गई है। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय विकास एजेंडा का हिस्सा मानी
जाने वाली 17 मूल योजनाओं पर होने वाले खर्च में केंद्र व राज्य की
हिस्सेदारी 60:40 के अनुपात में तय की है।
इनमें से ज्यादातर
योजनाएं वे हैं जिन्हें मोदी सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष के बजट में 'बी'
श्रेणी में रखते हुए कहा था कि इनमें केंद्र व राज्यों की भागीदारी नए सिरे
से तय की जाएगी।
नीति आयोग की ओर से मध्य प्रदेश के मुयमंत्री
शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में गठित मुयमंत्रियों के उप समूह की
रिपोर्ट पर गौर फरमाने के बाद केंद्र ने यह फैसला सुनाया।

यहां नहीं हुआ बदलाव
हालांकि
मनरेगा, राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम, अनुसूचित जाति, अनुसूचित
जनजाति, नि:शक्तों, अल्पसंयकों, पिछड़ा वर्ग व अन्य कमजोर वर्गो के विकास
से जुड़े समेकित कार्यक्रमों में हिस्सेदारी में तब्दीली नहीं की गई है।
वहीं प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के लिए अलग से निर्देश जारी किए
जाएंगे।

समन्वित बाल विकास योजना (आइसीडीएस) के लिए चालू वित्तीय
वर्ष में अतिरिक्त संसाधनों की व्यवस्था अनुपूरक बजट में की जाएगी।
राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम और हाल में शुरू की गई प्रधानमंत्री
कौशल विकास योजना में शामिल राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन को वित्तीय वर्ष
2016-17 से केंद्रीय सेक्टर की योजनाओं के रूप में संचालित करने की मंशा
जताई गई है।