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चीन के रेयर अर्थ मटेरियल ‘बम’ का पहला शिकार बनी सुजुकी, भारत-जापान में ईवी संकट गहराया

Rare Earth Magnet Supply Crisis: चीन की ओर से रेयर अर्थ मैग्नेट्स के निर्यात पर प्रतिबंध का वैश्विक ऑटो इंडस्ट्री पर असर दिखने लगा है।

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भारत

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MI Zahir

Jun 06, 2025

Rare Earth Magnet Supply Crisis

चीन की पाबंदियों से सुजुकी स्विफ्ट का प्रोडक्शन रुका, वैश्विक ईवी उद्योग पर संकट मंडराया। (फोटो: वाशिंगटन पोस्ट)

Rare Earth Magnet Supply Crisis: चीन की ओर से रेयर अर्थ मैग्नेट्स के निर्यात पर लगाए गए अंकुश का असर अब भारत सहित दुनियाभर की ऑटो इंडस्ट्री पर सीधा दिखने लगा है। यूरोप और जापान की कई ऑटोमोबाइल कंपनियों ने उत्पादन रोक दिया है या कभी भी रोकने की स्थिति बन गई है। चीन की ओर से 7 रेयर अर्थ मटीरियल्स की सप्लाई सख्त करने से तमाम कार कंपनियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इसकी पहली शिकार जापानी कंपनी सुजुकी को उठाना पड़ा है। निक्केई एशिया की रिपोर्ट के मुताबिक, सुजुकी ने जापान में स्विफ्ट के प्रोडक्शन को बंद कर दिया है। जापानी ऑटोमेकर ने कंपोनेंट की कमी का हवाला देते हुए 26 मई से 6 जून तक स्विफ्ट सबकॉम्पैक्ट के उत्पादन को रोकने का ऐलान किया है।

सप्लाई में अड़चन के कारण कई प्रोडक्शन यूनिट्स बंद

यूरोप की ऑटो सप्लायर यूनियन सीएलईपीए ने बताया कि चीन से रेयर अर्थ मैग्नेट्स की सप्लाई में अड़चन के कारण कई प्रोडक्शन यूनिट्स बंद करनी पड़ी है। अब तक केवल 25त्न एक्सपोर्ट लाइसेंस ही चीन ने मंजूर किए हैं। वहीं जर्मनी की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री बॉडी वीडीए ने कहा कि अगर स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो कारों का प्रोडक्शन पूरी तरह ठप हो सकता है।

भविष्य के लिए वैकल्पिक सप्लाई सोर्स खोजने होंगे

जापानी ऑटोमोबाइल कंपनी निसान ने कहा है कि वह जापान की सरकार के साथ मिलकर स्थिति से निपटने के उपाय तलाश रहा है। कंपनी से सीईओ इवान एस्पिनोसा ने कहा, हमें भविष्य के लिए वैकल्पिक सप्लाई सोर्स खोजने होंगे।

भारत की स्थिति हुई खराब

बजाज ऑटो और टीवीएस जैसी बड़ी कंपनियों ने चेतावनी दी है कि अगर यह संकट बना रहा तो उनकी ऊवी प्रोडक्शन जुलाई से पूरी तरह ठप हो सकती है। भारत के पास जून के आखिर तक प्रोडक्शन जारी रखने तक ऐसे मेटल्स का स्टॉक है। भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री का कहना है कि रेयर अर्थ मटीरियल सप्लाई के लगभग 30 आवेदन भारतीय अधिकारियों से क्लियर हो चुके हैं लेकिन चीन ने इसमें से एक को भी अभी तक मंजूरी नहीं दी है। स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो भारत में भी ईवी उत्पादन पर असर पड़ सकता है।

जर्मन कंपनियां भी मुश्किल में

बीएमडब्ल्यू ने माना कि उसके कुछ सप्लायर्स प्रभावित हुए हैं। वहीं मर्सिडीज बेंज ने कहा है कि कंपनी रेयर अथ्र्स की खपत घटाने पर काम कर रही है। वहीं फॉक्सवैगन फिलहाल स्थिर सप्लाई की बात कह रही है, लेकिन वह भी लगातार चीन से लाइसेंस मंजूरी पर नजर बनाए हुए है।

रेयर अर्थ संकट अब एक ग्लोबल सप्लाई संकट,क्या है आगे का रास्ता ?

एक्सपट्र्स ने बताया कि अगर चीन की पाबंदियां बनी रहीं तो ग्लोबल ईवी ट्रांजिशन को तगड़ा झटका लगेगा।कच्चे माल की कीमतें बढ़ेंगी, जिससे गाडिय़ों के दाम ऊपर जा सकते हैं। रेयर अर्थ संकट अब एक ग्लोबल सप्लाई संकट बनता जा रहा है। चीन की निर्भरता से निकलने के लिए कंपनियों को स्थानीय और वैकल्पिक सोर्सिंग मॉडल विकसित करने होंगे। सरकारों को भी अब स्ट्रैटेजिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए लॉन्ग टर्म रणनीति बनानी होगी।

क्यों इतना जरूरी है रेयर अर्थ मैग्नेट ?

चीन ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए अप्रेल में ट्रंप टैरिफ के जवाब में टेरबियम, यिट्रियम, डिस्प्रोसियम, गैडोलीनियम, ल्यूटेशियम, सैमरियम, स्कैंडियम के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया। इनका इस्तेमाल दुनियाभर में कारों, ईवी, एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर और मिलिट्री प्रोडक्शन में होता है। कारों में इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक मोटर, इंजन और बैटरी बनाने में होता है। इनके बिना ईवी और हाई-टेक ऑटोमोबाइल्स बनाना मुश्किल है।

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