
चीन ईवी कार के मामले में काफी आगे है। (PC: AI)
Chinese Electric Cars: दुनिया में तेल की कीमतें आग उगल रही हैं, लेकिन चीन ने मानो पहले से ही इसकी तैयारी कर रखी थी। जब कई देश अब भी पेट्रोल और डीजल वाली गाड़ियों पर अटके हुए हैं, तब चीन की इलेक्ट्रिक कारें सड़क से लेकर टेक्नोलॉजी तक हर मोर्चे पर बाजी मारती दिख रही हैं। हालात ऐसे हैं कि अब दुनिया की बड़ी ऑटो कंपनियों की नींद उड़ने लगी है।
बीजिंग ऑटो शो में इस बार जो नजारा देखने को मिला, उसने साफ कर दिया कि चीन सिर्फ कार नहीं बना रहा, बल्कि “चलता-फिरता टेक्नोलॉजी पैकेज” तैयार कर रहा है। कहीं कार में बैठते ही पैरों की मसाज शुरू हो जाती है, तो कहीं सीट घूमकर पीछे बैठने वालों को आराम से अंदर बैठने का रास्ता देती है। कई कारों में ऐसा कराओके सिस्टम लगा है, जो किसी प्रोफेशनल म्यूजिक स्टूडियो जैसा एहसास देता है।
कुछ मॉडल तो ऐसे भी हैं, जिनकी हेडलाइट्स दीवार पर फिल्म तक चला सकती है। यानी जहां चाहो, वहीं मिनी थिएटर बना लो। यही नहीं, सस्ती कारों में भी स्मार्ट ड्राइविंग और AI फीचर्स आम बात हो चुके हैं। अब चीन बाकी दुनिया को टेक्नोलॉजी से चुनौती दे रहा है।
चीन की कंपनियां बड़े पैमाने पर और कम कीमत में गाड़ियां बना रही हैं। यही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। ऊपर से ज्यादातर मॉडल इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड हैं। ऐसे समय में जब ईरान युद्ध की वजह से तेल और गैस की कीमतें आसमान छू रही हैं, तब इलेक्ट्रिक कारें लोगों को ज्यादा समझदारी वाला विकल्प लगने लगी हैं।
BYD जैसी कंपनियां खुलकर कह रही हैं कि बढ़ते पेट्रोल दाम लोगों को EV की तरफ धकेल रहे हैं। कंपनी की एग्जीक्यूटिव स्टेला ली ने कहा कि जो लोग एक बार इलेक्ट्रिक कार इस्तेमाल कर लेते हैं, वे फिर पेट्रोल गाड़ियों की तरफ लौटना नहीं चाहते।
चीन में अब आधे से ज्यादा नई कारें इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड बिक रही हैं। वहां की सड़कों पर इंजन की आवाज कम और इलेक्ट्रिक मोटर की हल्की गूंज ज्यादा सुनाई देती है। लेकिन घरेलू बाजार में मुकाबला इतना बढ़ गया है कि कंपनियों को अब विदेशों में नए ग्राहक तलाशने पड़ रहे हैं।
आंकड़े बताते हैं कि इस साल की पहली तिमाही में चीन की EV एक्सपोर्ट करीब 78 फीसदी बढ़ गई। यूरोप में BYD जैसी कंपनियां तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रही हैं। यूरोपीय देशों में BYD की नई कार रजिस्ट्रेशन लगभग 170 फीसदी तक बढ़ गई है।
हालांकि, अमेरिका अभी भी चीन की कार कंपनियों को लेकर सतर्क है। वहां चीनी कारों पर भारी टैरिफ लगाए गए हैं और कई तरह की पाबंदियां भी हैं। अमेरिकी नेताओं का कहना है कि चीनी कारों की एंट्री से स्थानीय उद्योग और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों को खतरा हो सकता है।
लेकिन चीन की कंपनियां इसे अलग नजर से देखती हैं। उनका कहना है कि खुला मुकाबला ही असली ताकत देता है। BYD का मानना है कि जरूरत से ज्यादा सुरक्षा देने से बाजार कमजोर पड़ जाता है।
असल डर सिर्फ सस्ती कारों का नहीं है। दुनिया को चीन की उत्पादन क्षमता और टेक्नोलॉजी दोनों डरा रही हैं। वहां की फैक्ट्रियां काफी हद तक ऑटोमेटेड हैं और सप्लाई चेन भी बेहद मजबूत है। इसी वजह से चीन तेजी से नई टेक्नोलॉजी बाजार में उतार पा रहा है।
अब चीन की कंपनियां सिर्फ गाड़ियां बेचने तक सीमित नहीं रहना चाहतीं। वे पूरा टेक इकोसिस्टम बना रही हैं। XPeng, Geely, BYD और Baidu जैसी कंपनियां ऐसी कारों पर काम कर रही हैं, जो भविष्य में खुद ड्राइव कर सकें और लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन जाएं।
कभी चीन विदेशी कंपनियों से टेक्नोलॉजी सीखता था। अब हालात उलट गए हैं। आज दुनिया चीन की EV टेक्नोलॉजी को गौर से देख रही है। जिस तरह 20वीं सदी में Ford अमेरिकी ताकत का प्रतीक बना था, उसी तरह अब इलेक्ट्रिक कारें चीन की नई पहचान बनती जा रही हैं।
Published on:
06 May 2026 01:39 pm
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