
तेल की कीमतों में आया उछाल। फोटो: एआइ
मीडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध से तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। इस वृद्धि को रोकने के सभी प्रयास विफल होते दिख रहे हैं। तेल कीमतों को रोकने के लिए किया गया सबसे बड़ा प्रयास भी बेअसर रहा।
अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने अपने आपातकालीन भंडार से 400 मिलियन बैरल कच्चे तेल को जारी करने का निर्णय लिया। इसके बावजूद गुरुवार सुबह अंतर्राष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया।
सुबह 8:25 बजे, इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज पर बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड का अप्रैल अनुबंध 100.09 डॉलर प्रति बैरल पर था, जो 8.82 फीसदी अधिक था। वहीं, एनवाईमेक्स पर वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) का अप्रैल अनुबंध 8.85 फीसदी बढ़कर 94.68 डॉलर प्रति बैरल हो गया।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इराक की समुद्री सीमा में अज्ञात हमले से इराक के दो तेल टैंकरों में आग लग गई। इराकी अधिकारियों की प्रारंभिक जांच में इस घटना को ईरानी हमला बताया है। इसके बाद इराक ने अपनी सभी तेल टर्मिनलों का संचालन बंद कर दिया है।
ईरान सैन्य कमान के प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फकारी ने बुधवार को तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचाने का दावा किया। उन्होंने कहा कि तेल की कीमत क्षेत्रीय सुरक्षा पर निर्भर करती है, जिसे अस्थिर कर दिया गया है।
इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास संगठन (UNCTAD) की रिपोर्ट "होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान - वैश्विक व्यापार और विकास पर प्रभाव" में बताया गया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सुमुद्री तेल व्यापार के साथ प्राकृति गैस, उर्वरकों का परिवहन करता है। दुनिया के लगभग एक चौथाई हिस्से का परिवहन इसी मार्ग से होता है। इस मार्ग में बाधा से जहाजों का परिवहन नहीं हो पा रहा है, जिसके चलते वैश्विक आपूर्ति की चिंताएं बढ़ गई है।
11 मार्च 2026 को अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के सदस्य देशों ने वैश्विक आपूर्ति दबाव को कम करने के लिए अपने भंडार से 400 मिलियन बैरल तेल जारी करने का निर्णय लिया। यह आईईए के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी तेल रिलीज है।
इसके बाद जारी एक बयान में भारत के पेट्रोलियम मंत्रालय ने इस कदम को स्वागत योग्य बताया। लेकिन गुरुवार को तेल की कीमतों ने इस आस को भी फेल कर दिया। भारत के लिए यह सबसे ज्यादा जरूरी है क्योंकि भारत अपनी जरूरतों का 90 फीसदी तेल आयात करता है, जिससे यह वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो जाता है।
Updated on:
12 Mar 2026, 11:04 AM IST
Published on:
12 Mar 2026, 11:04 AM IST
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