
विदेश जाने वाले स्टूडेंट्स की कमाई घट रही है। (PC: AI)
Study Abroad: भारतीय छात्रों के बीच विदेश जाकर पढ़ाई करने का क्रेज अब धीरे-धीरे कम हो रहा है। पिछले कुछ सालों में जिस तेजी से छात्र बाहर जा रहे थे, अब उस रफ्तार में गिरावट देखने को मिल रही है। बढ़ते खर्च, वीजा के कड़े नियम और भारत में ही विदेशी विश्वविद्यालयों के कैंपस खुलने से छात्र ग्लोबल एजुकेशन के लिए नए विकल्प चुन रहे हैं। हेनली एजुकेशन रिपोर्ट 2026 के मुताबिक, विदेश जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या 2018 में 5.18 लाख थी, जो 2024 में बढ़कर 13.30 लाख तक पहुंच गई। वहीं 2025 में यह संख्या 12 लाख से कम है।
4 देशों (यूएस, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया) को जाने वाले छात्रों की संख्या 2024 के मुकाबले 2025 में करीब 35% तक घट गई। हालांकि, भारतीयों ने 2025 में विदेश में पढ़ाई पर 3.71 अरब डॉलर खर्च किए, जो 2018 के 2.83 बिलियन डॉलर से 31% ज्यादा है। यह दिखाता है कि भारतीय अपने बच्चों की शिक्षा पर बड़ा निवेश कर रहे हैं।
अमेरिका, ब्रिटेन कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जाने वाले स्टूडेंट्स की संख्या की बात करें, तो यह 2020 में 2,59,655 रुपये थी। 2021 में यह 4,44,553, साल 2022 में 7,50,365 पर और साल 2023 में 8,92,989 पर पहुंच गई। इसके बाद से इसमें गिरावट आने लगी। 2024 में यह गिरकर 7,59,064 पर और 2025 में 4,90,000 पर आ गई है।
हेनले अपॉर्च्युनिटी इंडेक्स 2026 के अनुसार, सबसे अधिक सैलरी ग्रोथ वाले देशों की लिस्ट में स्विट्जरलैंड टॉप है। इसका इंडेक्स स्कोर 86 है। दूसरे स्थान पर सिंगापुर (81) है। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया, यूएस--यूके, कनाडा, ऑस्ट्रिया, यूएई और न्यूजीलैंड का स्थान आता है। भारत का स्कोर 39 है।
Published on:
09 Apr 2026 12:50 pm
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