9 अप्रैल 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Crude Oil Prices: क्रूड ऑयल ने फिर खाई पलटी, लेबनान में हमलों से कीमतों में आ गया उछाल

Hormuz Strait: तेल बाजार में हालिया गिरावट के बाद तेज रिकवरी आई है, लेकिन होरमुज जलडमरूमध्य और मिडिल ईस्ट तनाव के कारण अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे कीमतों में उतार चढाव जारी रह सकता है।

2 min read
Google source verification
Brent crude nears $97, Brent and WTI surge, supply concerns rise again

होरमुज संकट के बीच तेल कीमतों में जोरदार रिकवरी। फोटो: एआइ

Global Energy: ऊर्जा बाजार में इन दिनों लगातार भारी उतार चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इसका मुख्य कारण मिडिल ईस्ट में चल रहा तनाव है, जिसके कारण निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। पिछले सत्र में तेल की कीमतों में भारी गिरावट के बाद गुरुवार को कुछ रिकवरी देखने को मिल रही है। शुरुआती कारोबार ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 2.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई। जबकि पिछले सत्र में एक साथ 13 फीसदी की गिरावट आ गई थी।

क्या हैं कच्चे तेल की कीमतें?

पिछले सत्र में आई गिरावट के बाद गुरुवार को तेल कीमतों में तेज रिकवरी देखी गई। इससे बाजार में फिर हलचल तेज हो गई। ब्रेंट क्रूड की कीमत जून डिलीवरी के लिए 2.1 प्रतिशत बढ़कर 96.73 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई, जबकि डब्ल्यूटीआई मई के लिए 2.7 प्रतिशत उछलकर 96.99 डॉलर प्रति बैरल हो गया। इससे पहले एक दिन में करीब 13 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी।

क्या सीजफायर बेअसर रहा

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तेल आपूर्ति का सबसे अहम मार्ग माना जाता है, जहां से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल और एलएनजी गुजरता है। युद्ध शुरु होने के बाद से ही ईरान ने इस महत्वपूर्ण मार्ग को अवरूद्ध कर रखा है। हालिया घटनाओं के बाद इस क्षेत्र में टैंकर मूवमेंट लगभग ठप होने की खबरें सामने आई हैं।

वहीं सीजफायर के बाद मिडिल ईस्ट में जारी सैन्य गतिविधियों ने अनिश्चितता बढ़ा दी है। इजराइल द्वारा लेबनान में ऑपरेशन और ईरान की ओर से खाड़ी क्षेत्र में हमलों ने हालात को जटिल बना दिया है। इसके चलते गुरुवार को ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेजी देखने को मिली। इससे पहले ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद-बघर गालिबफ ने दावा किया है कि समझौते की कई शर्तों का उल्लंघन हो चुका है। वहीं अमेरिका और इजराइल के साथ मतभेद इस बात पर बने हुए हैं कि सीजफायर का दायरा किन क्षेत्रों तक लागू होता है।

हालात कब तक होंगे सामान्य

विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही होर्मुज में शिपिंग धीरे धीरे सामान्य हो जाए, लेकिन सप्लाई पूरी तरह बहाल होने में समय लगेगा। क्योंकि हमलों के दौरान कई ऑयल और गैस फील्ड को भारी नुकसान हुआ है। इसके चलते उत्पादन कम किया गया है और कुछ रिफाइनरी ने अपने ऑपरेशन अस्थायी रूप से बंद कर दिए हैं। हालात को सामान्य होने में काफी समय लग सकता है। इससे ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता बनी रहेगी और कीमतों में उतार चढाव जारी रह सकता है।

आने वाले दिनों में कूटनीतिक बातचीत, क्षेत्रीय सुरक्षा कदम और उत्पादन स्तर से जुड़ी घोषणाएं बाजार की दिशा तय करेंगी, इसलिए ट्रेडर्स और नीति निर्माता दोनों के लिए यह स्थिति अहम बनी हुई है और सभी की नजरें ताजा घटनाक्रम पर टिकी रहेंगी।