
चीन ने अमेरिका से सोयाबीन खरीदना लगभग बंद कर दिया है। (PC: Gemini)
अमेरिका की टैरिफ पॉलिसी अब उसी पर भारी पड़ती दिख रही है। जहां पहले अमेरिका टैरिफ के नाम पर पूरी दुनिया को हड़काने की कोशिश कर रहा था, वहीं अब वह ही अकेला पड़ता दिख रहा है। एक तरफ यूरोप है, जिसे यह सीख मिली है कि वह अब खुद को अमेरिकी सुरक्षा के भरोसे नहीं रख सकता। अपना रक्षा बजट बढ़ाकर यूरोप सैन्य शक्ति में आत्मनिर्भर बनने की तरफ बढ़ रहा है। दूसरी तरफ भारत सहित ब्रिक्स कंट्रीज अमेरिका से इतर अपने कारोबारी रिश्ते तलाश रही हैं। ताजा उदाहरण सोयाबीन का है। अमेरिकी सोयाबीन किसान परेशान हैं, क्योंकि उनकी उपज बिक नहीं रही है।
अमेरिका सोयाबीन का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। वहीं, चीन सोयाबीन का सबसे बड़ा खरीदार देश है। टैरिफ वॉर से पहले चीन अमेरिका से बड़ी मात्रा में सोयाबीन खरीदता था। लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार, सितंबर-अक्टूबर के लिए चीन ने अमरीका से एक भी टन सोयाबीन का कॉन्ट्रैक्ट नहीं किया है। जुलाई में भी चीन ने अमेरिका से सिर्फ 4.2 लाख टन सोयाबीन खरीदा था। अपना सोयाबीन नहीं बिकने से अमेरिकी किसान बुरी तरह परेशान हैं। अमेरिका के सोयाबीन किसानों ने ट्रंप को चिट्ठी लिखकर चेतावनी दी है। किसानों ने कहा कि वे अपने सबसे बड़े ग्राहक चीन को खोकर सर्वाइव नहीं कर सकते।
ब्रिक्स देशों ने अमेरिका पर आर्थिक दबाव बनाना शुरू कर दिया है। चीन और रूस भारतीय सामानों के लिए अपने बाजार खोल रहे हैं। भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने कहा कि अमेरिका धौंस जमाने वाला व्यवहार कर रहा है। उन्होंने कहा कि चीन भारत के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा। उधर रूस के उप राजदूत रोमन बाबुश्किन ने कहा कि अगर भारत को अमेरिकी बाजार में अपना सामान बेचने में परेशानी हो रही है, तो रूस का दरवाजा खुला है। हम भारतीय निर्यात के स्वागत को तैयार हैं। चीन भी अब अमेरिका के बजाय ब्राजील से सोयाबीन खरीद रहा है। ब्राजील एक ब्रिक्स देश है। पिछले महीने चीन के कुल सोयाबीन आयात में से लगभग 90% ब्राजील से आया था।
भारत और रूसी नेतृत्व वाले यूरेशियन आर्थिक संघ (ईएईयू) के बीच मुक्त व्यापार समझौते को लेकर वार्ता शुरू हो गई है। इस पर बुधवार को दोनों पक्षों ने टर्म्स ऑफ रेफरेंस पर हस्ताक्षर भी किए। गौरतलब है कि यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन यूरेशिया में स्थित पांच सोवियत राज्यों का एक आर्थिक संघ है।
भारत ने सीमा तनाव को कम करने के लिए एक लंबे समय से लंबित चीनी प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त की है और साथ ही डायरेक्ट फ्लाइट्स और व्यापारिक संबंधों को फिर से शुरू किया है। रेयर अर्थ्स जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में विशेष रूप से व्यापार सहयोग का पता लगाने की भी समझ बन गई है। चीन ने भारत को दुर्लभ खनिज, उर्वरक और टनल निर्माण में इस्तेमाल होने वाली भारी मशीनों की आपूर्ति का भरोसा दिया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत चीनी व्यापार पेशेवरों के लिए वीजा प्रतिबंधों में भी ढील दे सकता है।
Published on:
23 Aug 2025 11:17 am
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