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इन कर्मचारियों की असमय मौत पर EPFO देगा 15 लाख रुपये, रकम में 7.2 लाख रुपये की हुई बढ़ोतरी

ईपीएफओ ने कहा कि यह रकम उस कर्मचारी के परिवारजनों को दी जाएगी, जिसकी सेवा के दौरान मृत्यु हो जाती है।

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भारत

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Ashish Deep

Aug 21, 2025

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केंद्रीय कर्मचारी को दिवाली गिफ्ट मिलने वाला है। (फोटो : फ्री पिक)

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने अपने कर्मचारियों के हित में एक बड़ा फैसला किया है। ईपीएफओ ने सेंट्रल बोर्ड कर्मचारियों को मिलने वाले डेथ रिलीफ फंड की एक्स-ग्रेशिया रकम को 8.8 लाख रुपये से बढ़ाकर 15 लाख रुपये कर दिया है। यह नई व्यवस्था 1 अप्रैल 2025 से लागू होगी। ईपीएफओ ने कहा कि यह रकम उस कर्मचारी के परिवारजनों (नामांकित व्यक्ति या कानूनी वारिस) को दी जाएगी, जिसकी सेवा के दौरान मृत्यु हो जाती है। यह भुगतान स्टाफ वेलफेयर फंड से किया जाएगा।

कानूनी वारिस को मिलेगी रकम

संगठन की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि सेंट्रल प्रोविडेंट फंड कमिश्नर/प्रेसिडेंट, सेंट्रल स्टाफ वेलफेयर कमेटी, ईपीएफओ की मंजूरी के बाद डेथ रिलीफ फंड की एक्स-ग्रेशिया रकम 8.80 लाख रुपये से बढ़ाकर 15 लाख रुपये की जाती है। यह रकम मृतक कर्मचारी के नामांकित व्यक्ति या कानूनी वारिस को स्टाफ वेलफेयर फंड से प्रदान की जाएगी।

हर साल 5% की होगी बढ़ोतरी

ईपीएफओ ने साफ किया है कि यह एक्स-ग्रेशिया रकम सिर्फ एक बार नहीं बल्कि हर साल बढ़ेगी। 1 अप्रैल 2026 से इसमें हर साल 5% की बढ़ोतरी की जाएगी। इसका मतलब है कि आने वाले वर्षों में कर्मचारियों के घरवालों को और अधिक आर्थिक सुरक्षा मिल सकेगी।

ईपीएफओ में 2025 के किए बड़े बदलाव

साल 2025 में ईपीएफओ ने अपने सब्सक्राइबर्स और उनके परिवारों की सुविधा के लिए कई अहम सुधार किए हैं।

  1. डेथ क्लेम प्रक्रिया सरल : अब नाबालिग बच्चों के बैंक खाते में सेटलमेंट के लिए गार्जियनशिप सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं होगी। इससे परिवारजनों को बिना देरी आर्थिक मदद मिल सकेगी।
  2. ज्वाइंट डिक्लेरेशन प्रक्रिया आसान : जिन सदस्यों का आधार अब तक UAN से लिंक/वेरिफाई नहीं हुआ है या आधार विवरण में सुधार करना है, उनके लिए यह प्रक्रिया अब और सरल कर दी गई है।

कौन होता है सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज में

सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) ईपीएफओ की सबसे बड़ी नीति निर्माता संस्था है। इसमें केंद्र और राज्य सरकारों के प्रतिनिधि, नियोक्ता और कर्मचारी शामिल होते हैं। यह संस्था समय-समय पर कर्मचारियों और उनके परिजनों के हित में नीतिगत फैसले लेती है।