
मुंबई में सोना सस्ता मिल रहा है। (PC: AI)
Gold News: केंद्र सरकार ने सोना, चांदी और प्लैटिनम से जुड़े सभी प्रकार के सामानों के आयात पर सख्त पाबंदियां लगा दी हैं। यह फैसला फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) के जरिए हो रहे दुरुपयोग को रोकने के लिए किया गया है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, ये प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से लागू होंगे और किसी भी पुराने अनुबंध, लेटर ऑफ क्रेडिट, अग्रिम भुगतान या शिपमेंट की स्थिति पर कोई छूट नहीं दी जाएगी। यानी पहले से तय सौदों पर भी नए नियम लागू होंगे। सरकार ने साफ किया है कि ट्रांजिशनल अरेंजमेंट का लाभ भी नहीं मिलेगा।
इस फैसले के तहत ‘चैप्टर 71' में आने वाले सभी उत्पादों की आयात नीति में बदलाव किया गया है। इसमें मोती, कीमती और अर्ध कीमती पत्थर, सोना-चांदी जैसी धातुएं, आभूषण, नकली ज्वैलरी और सिक्के शामिल हैं। इससे पहले भी सरकार ने सोने- चांदी के आभूषणों पर रोक लगाई थी। लेकिन अब दायरा बढ़ाकर सभी संबंधित वस्तुओं को शामिल कर लिया गया है। भारत का 10 देशों के समूह आसियान के साथ 2010 से एफटीए है, जिसके तहत कई वस्तुओं पर कम या शून्य शुल्क है। इस लूपहोल का फायदा उठा कुछ व्यापारी प्लैटिनम बोल ड्यूटी फ्री सोना आयात कर रहे थे।
कुछ आयातक भारत-आसियान एफटीए का गलत फायदा उठा रहे थे। वे कम या शून्य आयात शुल्क का लाभ लेकर थाईलैंड जैसे देशों से बिना जड़े आभूषण, प्लैटिनम ज्वैलरी के नाम पर बड़े पैमाने पर बिना ड्यूटी चुकाएं सोने का आयात कर रहे थे। इस ज्वैलरी में करीब 90% हिस्सा सोने का होता है, जबकि केवल 4% प्लैटिनम होता था। लेकिन इसे फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का लाभ उठा प्लैटिनम ज्वैलरी बोल शून्य शुल्क पर आयात किया जा रहा था। इससे मुंबई के बाजार में सोना सस्ता बिक रहा है और असली कारोबार प्रभावित हो रहा था। इससे सरकार को राजस्व नुकसान हो रहा था और घरेलू उद्योग पर भी दबाव बढ़ा था।
उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस खामी का फायदा उठाकर विभिन्न बंदरगाहों के जरिए पिछले दो महीनों में करीब 5 टन ऐसी ज्वैलरी भारत में आ चुकी है। इससे सरकार को लगभग 450 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ है। यह नुकसान हर महीने बढ़ रहा है, जिससे सरकारी खजाने पर दबाव पड़ रहा है।
सरकार का मानना है कि इन नई पाबंदियों से ऐसे अनुचित व्यापार पर रोक लगेगी और आयात में पारदर्शिता आएगी। हालांकि, इस फैसले पर उद्योग जगत की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई है। कुछ विशेषज्ञों ने कदम का समर्थन किया है, लेकिन साथ ही सरकार से लाइसेंसिंग प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि कड़े नियमों के कारण ईमानदार कारोबारियों को भी परेशानी हो सकती है।
Published on:
03 Apr 2026 01:06 pm
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