
Major decision on time scale pay arrears for employees in MP- Demo Pic
8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों में ऊहापोह की स्थिति है। पता नहीं यह समय से लागू हो पाएगा या नहीं क्योंकि सरकार की तरफ से अब तक न आयोग बना है और न ही दूसरी शर्तें पूरी हुई हैं। आयोग बनने के बाद सैलरी रिवीजन, पेंशन और भत्तों का क्या होगा, उनमें कितनी बढ़ोतरी होगी। इन सब सवालों के झंझावत में कर्मचारी झूल रहे हैं। जानकार बताते हैं कि सैलरी इंक्रीमेंट में महंगाई की दर सबसे बड़ा फैक्टर होती है। इसके आधार पर ही फिटमेंट फैक्टर में बढ़ोतरी होती है। उसके आधार पर ही कॉस्ट ऑफ लिविंग तय होती है। इसलिए 5वें वेतन आयोग से 7वां वेतन आयोग आते-आते सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में 605 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। यानी 19 साल में बेसिक सैलरी 2550 रुपये महीने से बढ़कर 18000 रुपये पर पहुंच गई।
5वें वेतन आयोग को 1997 में लागू किया गया था। उस समय मुद्रास्फीति की सामान्य दर 7 फीसदी पर थी और न्यूनतम पे 2550 रुपये महीना हुआ करती थी।
छठा वेतन आयोग 2008 में आया और उस समय महंगाई की दर बढ़कर 8 से 10 फीसदी के बीच पहुंच गई थी। न्यूनतम बेसिक पे 7000 रुपये हो गई थी। पुराने आयोग से 4450 रुपये का इंक्रीमेंट मिला था। इस आयोग के आने के बाद सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में बंपर उछाल आया था। उसके साथ पे बैंड, ग्रेड पे की शुरुआत हुई थी।
7वें वेतन आयोग को 2016 में लागू किया गया था। उस दौरान महंगाई की दर 5 से 6 फीसदी थी और न्यूनतम सैलरी बढ़कर 18000 रुपये महीना हो गई थी। एक कर्मचारी की सैलरी में 11 हजार रुपये की बढ़त हुई थी। इस आयोग में पे मैटिक्स का गणित लाया गया। पेंशन में भी बढ़ोतरी का मानक लागू हुआ। उस दौरान ही वर्क लाइफ बैलेंस पर चर्चा शुरू हुई थी।
8वें वेतन आयोग के बारे में कहा जा रहा है कि यह जनवरी 2026 से लागू होगा। उस समय भी महंगाई की दर 6 से 7 फीसदी के बीच रहने की उम्मीद है। एंबिट इंस्टिट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट के मुताबिक इस बार सैलरी में 30 से 34 फीसदी का उछाल आने की उम्मीद है। हालांकि अब तक इसकी सरकार की तरफ से घोषणा नहीं हुई है। नया वेतनमान महंगाई और इकोनॉमिक ग्रोथ को ध्यान में रखकर दिया जाएगा।
Updated on:
18 Sept 2025 05:20 pm
Published on:
18 Sept 2025 05:18 pm
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