नई दिल्ली। मोदी सरकार शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, भारत पेट्रोलियम और अन्य तीन कंपनियों से अपनी हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। खास बात तो ये है कि सरकार इन पांचों में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी है। सरकार की ओर से पांचों से अपनी हिससेदारी बेचने के लिए वित्त मंत्रालय की ओर से एक कैबिनेट ड्राफ्ट नोट भी जारी किया गया है। कैबिनेट की बैठक में इसे मंजूरी मिल सकती है। आपको बता दें कि अक्टूबर महीने में मोदी सरकार के विनिवेश विभाग ने 12 विज्ञापन जारी कर एसेट वैल्यूवर, लीगर एडवाइजर की नियुक्ति और हिस्सा बेचने की बोलियां मंगाई है। सरकार भारत पेट्रोलियम से अपना 53.29 फीसदी हिस्सा बेचना चाहती है। कंपनी का मैनेजमेंट कंट्रोल भी ट्रांसफर होगा। शिपिंग सेक्टर की सरकारी कंपनी शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया में 63.75 की पूरी हिस्सेदारी बेचने का प्रस्ताव है। सरकार कंटेंनर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया यानी कोनकोर में अपनी 30 फीसदी हिस्सेदारी बेचने और मैनजेमेंट कंट्रोल देने की तैयारी में है। पॉवर सेक्टर कंपनी टीएचडीसी को एनटीपीसी के हाथों देने की तैयारी शुरू हो गई है। एनईईपीसीओ को एनएचपीसी के हाथों सौंपा जाएगा।