
भारतीय बाजार अब सोमवार का इंतजार कर रहा है। फोटो: एआइ
तीन हफ्ते की तबाही के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ट्रुथसोशल अकाउंट पर ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान को कम करने के संकेत दिए है। बस इतना ही काफी था और अमेरिकी शेयर बाजार के बेंचमार्क इंडेक्स के मार्केट कैपिटलाइजेशन में लगभग 900 बिलियन डॉलर की वृद्धि हुई। ग्लोबल बाजारों में भी हलचल मच गई। अब भारतीय बाजार के एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोमवार को एशियाई और भारतीय बाजार फ्लैट से गैप-अप ओपनिंग दे सकते हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह राहत टिकाऊ है या फिर ट्रंप का एक और U-टर्न बाजार को वापस पटखनी दे देगा?
शुक्रवार को S&P 500 इंट्राडे में 6,473 अंक तक गिर गया था। फिर ट्रंप की ट्रुथसोशल अकाउंट पर एक पोस्ट आई और देखते ही देखते इंडेक्स 6,506 अंक पर बंद हुआ। इस एक पोस्ट ने S&P 500 में 900 बिलियन डॉलर का मार्केट कैप वापस ला दिया। हालांकि इस रिकवरी के बावजूद S&P 500 ने पूरे हफ्ते में 1 ट्रिलियन डॉलर का मार्केट कैप गंवाया। यानी एक पोस्ट ने राहत दी, लेकिन हफ्तेभर का नुकसान पूरा नहीं हुआ। यह आधुनिक बाजार की सबसे बड़ी सच्चाई है कि आज के दौर में किसी देश के राष्ट्रपति का एक बयान पूरी दुनिया के बाजारों की दिशा बदल सकता है।
जंग कम होने के संकेत के साथ ही कुछ सेक्टर्स के लिए दरवाजे खुलते दिख रहे हैं और कुछ के लिए बंद होते हैं। SMC ग्लोबल सिक्योरिटीज की सीनियर रिसर्च एनालिस्ट सीमा श्रीवास्तव के मुताबिक क्रूड गिरने से NTPC, रिलायंस इंडस्ट्रीज और NHPC जैसी एनर्जी कंपनियों को फ्यूल कॉस्ट में राहत मिलेगी। GAIL को गैस की बढ़ती डिमांड का फायदा होगा। मारुति सुजुकी और टाटा मोटर्स जैसी ऑटो कंपनियों की बिक्री बढ़ सकती है क्योंकि पेट्रोल सस्ता होने से लोगों की जेब में पैसा बचेगा।
लार्सन एंड टुब्रो जैसी कैपिटल गुड्स कंपनियों को सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च बढ़ने का फायदा मिल सकता है। इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा सेक्टर को भी रुपया मजबूत होने से इम्पोर्ट कॉस्ट में राहत मिलेगी। दूसरी तरफ इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन जैसी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के मार्जिन पर दबाव आ सकता है क्योंकि क्रूड सस्ता होने पर इनकी रिफाइनिंग मार्जिन घटती है।
पिछले हफ्ते मजबूत डॉलर और सेंट्रल बैंकों के हॉकिश रुख यानी ब्याज दरों को स्थिर रखना और सख्त मौद्रिक नीति अपनाने के कारण सोने के भाव नीचे की ओर लुढ़के। लेकिन अब तस्वीर बदलती दिख रही है। SEBI रजिस्टर्ड एक्सपर्ट अनुज गुप्ता के मुताबिक जंग कम होने से क्रूड गिरेगा, महंगाई का डर कम होगा, डॉलर कमजोर पड़ेगा और फिर US Fed रेट कट की चर्चा शुरू होगी।
यह पूरी चेन सोने और चांदी के लिए बेहद अनुकूल है। अभी COMEX पर सोना 4,575 डॉलर प्रति औंस के आसपास है और अगर ट्रंप के रुख में कोई U-टर्न नहीं आया तो 4,620 से 4,650 डॉलर का टारगेट संभव है। MCX पर सोना 1,45,000 रुपये के करीब है और तेजी बनी रही तो 1,50,000 से 1,55,000 रुपये तक जा सकता है। लेकिन यह सब इस बात पर निर्भर है कि ट्रंप अपनी बात से U-टर्न न लें।
भारतीय बाजार इस वक्त एक संकरी गली में फंसा हुआ है। चॉइस ब्रोकिंग (Choice Broking) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सुमीत बगाड़िया के मुताबिक निफ्टी के लिए 22,950 से 23,000 का जोन मजबूत सपोर्ट है। यहां से नीचे गया तो और कमजोरी आएगी। ऊपर की तरफ 23,250 से 23,300 का जोन कड़ा रेजिस्टेंस बना हुआ है। यहां पहुंचते ही बिकवाली का दबाव आ जाता है। यानी बाजार इन दो लेवल्स के बीच झूल रहा है।
RSI 31.84 पर है जो बताता है कि बाजार ओवरसोल्ड जोन के करीब है और शॉर्ट टर्म में एक बाउंस आ सकता है। लेकिन India VIX 22.81 पर है जो हाई वोलैटिलिटी का संकेत है। ऑप्शन डेटा में 23,000 पर स्ट्रॉन्ग पुट राइटिंग और 23,300 पर कॉल राइटिंग यही बता रही है कि बाजार फिलहाल इसी दायरे में कैद रहेगा।
Updated on:
21 Mar 2026, 5:16 PM IST
Published on:
21 Mar 2026, 5:16 PM IST
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