
भारत के पास बिजली संकट से बचने के कई उपाय है। फोटो: एआइ
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच छिड़ी जंग ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लगभग बंद कर दिया है। दुनिया के सबसे व्यस्त ऊर्जा गलियारों में से एक के ठप होने से भारत जो दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG आयातक है एक साथ दो मोर्चों पर संकट में घिर गया है- रसोई गैस और बिजली। गैस सप्लायर्स ने फोर्स मेज्योर नोटिस देने शुरू कर दिए हैं। देश फिलहाल सबसे बड़े कुकिंग गैस संकट की कगार पर खड़ा है। लेकिन केंद्र सरकार का दावा है कि इस गर्मी में बिजली की मांग पूरी होगी और उसके पास इसका ठोस प्लान भी है।
भारत में आने वाली LPG गैस का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आता है। सप्लायर कंपनियों ने अपने भारतीय खरीदारों को फोर्स मेज्योर नोटिस भेज दिए हैं, जिसका मतलब है कि वे अपनी सप्लाई की जिम्मेदारी से अस्थायी रूप से मुक्त हो रहे हैं।
बिजली के मोर्चे पर स्थिति थोड़ी बेहतर है, क्योंकि भारत की कुल बिजली उत्पादन में गैस की हिस्सेदारी महज 2 फीसदी है। लेकिन पीक डिमांड यानी भीषण गर्मी या लू के दौरान गैस से 8 गीगावाट बिजली आती है, जो एक महत्वपूर्ण बैकअप का काम करती है। अब वह बैकअप खतरे में है।
बिजली सचिव पंकज अग्रवाल ने एक उद्योग कार्यक्रम के दौरान रॉयटर्स को बताया कि "हमें पूरा भरोसा है कि मध्य-पूर्व संकट बिजली मांग पूरी करने में बाधा नहीं बनेगा।" इसके साथ ही सरकार ने चार-स्तरीय रणनीति तैयार की है।
इस संकट के बीच एक बड़ी राहत की खबर भी आई है। कोयला मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि भारत ने लगातार दूसरे वर्ष 1 अरब मेट्रिक टन कोयला उत्पादन का आंकड़ा पार किया है। यह उपलब्धि सिर्फ एक संख्या नहीं है। यह भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में सबसे बड़ा कदम है। सरकार ने देश के तमाम कोयला आधारित बिजली उत्पादकों को पहले ही निर्देश दे दिया है कि गैस सप्लाई बंद होने की स्थिति में वे बिना रुके बिजली आपूर्ति जारी रखने के लिए तैयार रहें।
इस संकट का सीधा असर भारतीय कारोबार पर भी पड़ रहा है। LPG की किल्लत से होटल, रेस्टोरेंट और छोटे उद्योग जो गैस पर निर्भर हैं, मुश्किल में आ गए हैं। आम घरों में सिलेंडर की कीमत और उपलब्धता दोनों पर दबाव बढ़ चुका है। दूसरी तरफ, इस संकट ने कोयला और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक बड़ा मौका खोल दिया है। Coal India, NTPC जैसी कंपनियां और सौर-पवन ऊर्जा क्षेत्र में काम करने वाली Adani Green, NTPC Renewable जैसी कंपनियों की डिमांड बढ़ सकती है।बैटरी स्टोरेज सेक्टर जो अभी तक सरकारी प्राथमिकता की सूची में था अब तेजी से अमल में आ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य-पूर्व संकट ने भारत को एक बार फिर याद दिला दिया है कि गैस आयात पर निर्भरता एक रणनीतिक कमजोरी है। भारत की ऊर्जा नीति पहले से ही 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता की ओर बढ़ रही है। ऐसे में यह संकट उस दिशा में कदम तेज करने की वजह बन सकता है। फिलहाल सरकार का फोकस इस गर्मी को बिना बिजली कटौती के निकालने पर है।
Updated on:
22 Mar 2026, 1:35 PM IST
Published on:
22 Mar 2026, 1:35 PM IST
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