
gold price
देश में टैक्स सुधारों को दिशा के मकसद से वस्तु एं सेवा कर को आगामी 1 जुलाई से लागू करने की कोशिशों में केंद्र और राज्य की सरकारें पूरी तरह से जुट गई हैं। इस संबंध में शनिवार 3 जून को जीएसटी काउंसिल की अहम बैठक में सोने पर टैक्स की दरें तय करने का मुद्दा मुख्य रुप से बना रहेगा।
वहीं जीएसटी लागू के बाद समान्य जरुरतों की लगभग 2 हजार से 2500 वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित करने और कीमतें तय करने की दिशा में वित्त मंत्रालय जुटा हुआ है। फिलहाल सरकार यह निश्चित करने में लगी हुई है कि जीएसटी लागू होने के पहले और बाद में वस्तुओं की कीमतों में क्या अंतर आएगा। वित्त मंत्रालय को इस बैठक में सोने के अलावा ज्वैलरी, अपैरल, टैक्सटाइल, बीड़ी, सिगरेट, फुटवेयर और फॉर्म इक्विपमेंट जैसे वस्तुओं पर कीमतें तय होनी है।
गोल्ड पर टैक्स की दरें तय करने को लेकर राज्यों और ज्वैलर्स की अलग-अलग राय सामने आ रही हैं। बावजूद इसके सोने पर काउंसिल की बैठक में दरें तय करने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि आने वाले दिनों में सोना सस्ता होगा या फिर महंगा होगा। अलग-अलग रायों को लेकर बंगाल और केरल गोल्ड पर 2 फीसदी लेवी चाहती है, तो वहीं बाकी के राज्य सोने पर 5 फीसदी टैक्स की बात पर सहमत हैं।
इन सबके बावजूद जेम्स एंड ज्वैलर्स फेडरेशन ने गोल्ड पर 2.25 फीसदी लेवी तय कर रखी है। कम कर की वकालत करने वालों का मानना है कि ऐसा करने से गोल्ड की तस्करी में कमी आ सकती है। सर्राफा करोबारियों का मनना है कि सोने और उससे जुड़ी आभूषणों पर 2 फीसदी जीएसटी की दर लागू की जानी चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से गोल्ड में पारदर्शिता के साथ राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी।
ध्यान हो कि फिलहाल सोने पर 1 फीसदी वैट टैक्स के अलावा 1 फीसदी उत्पादन शुल्क वसूला जाता है। जबकि अगर इसमें 10 फीसदी सीमा कर को जोड़ा जाए तो कुल टैक्स की दरें 12 फीसदी तक हो जाती है। ऐसे में अगर जीएसटी काउंसिल की बैठक में गोल्ड पर 12 फीसदी से अधिक जीएसटी कर लागू करती है, तो ऐसे में सोने पर 18 फीसदी टैक्स दरें तय करती है, तो सोना महंगा हो जाएगा।
Published on:
03 Jun 2017 12:44 pm
बड़ी खबरें
View Allकारोबार
ट्रेंडिंग
