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स्विगी, जोमैटो से खाना मंगवाना हुआ महंगा, जरूरी दवाओं पर GST नहीं, काउंसिल की बैठक में लिए गए ये निर्णय

जीएसटी काउंसिल की बैठक में केरल हाई कोर्ट के सुझाव पर पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने पर चर्चा की गई। इसके साथ ही स्विगी तथा जोमैटो जैसी ऑनलाइन फूड सर्विस प्रोवाइडर के लिए टैक्स सिस्टम में बदलाव किया गया है। कई जरूरी दवाओं को भी जीएसटी से मुक्त कर दिया गया अथवा उन पर टैक्स की दर कम कर दी गई है।

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नई दिल्ली। जीएसटी काउंसिल की 45वीं बैठक में शुक्रवार को पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने पर विचार हुआ। कई राज्यों के विरोध के कारण इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया। बैठक में कई फैसले लिए गए। ऑनलाइन फूड सर्विस प्रोवाइडर कंपनीज जैसे स्विगी और जोमैटो के लिए भी टैक्स सिस्टम में नया बदलाव किया गया है। इसके साथ ही कई जीवनरक्षक दवाओं को जीएसटी फ्री कर दिया गया। कोरोना की जिन दवाओं पर जीएसटी दर 30 सितंबर तक के लिए घटाई गई थी, उसे बढ़ाकर 31 दिसंबर तक कर दिया गया है। यह कटौती सिर्फ रेमेडेसिविर जैसी दवाओं के लिए है। इसमें मेडिकल उपकरण शामिल नहीं हैं।

लखनऊ में शुरू हुई बैठक शनिवार तक चलेगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि केरल हाई कोर्ट के सुझाव पर पेट्रोल-डीजल को लेकर चर्चा की गई। राज्यों ने साफ तौर पर इसे खारिज कर दिया। यूपी महाराष्ट्र, झारखंड, कर्नाटक, केरल, छत्तीसगढ़ समेत ज्यादातर राज्यों ने पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे से बाहर रखने पर जोर दिया।

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राज्यों का कहना है कि जीएसटी के तहत पेट्रोल-डीजल पर फैसला करने का यह सही समय नहीं है। राजस्व को लेकर बहुत विचार-विमर्श करना होगा। केन्द्र ने एक देश-एक दाम के तहत पेट्रोल-डीजल, नेचुरल गैस व एविएशन टर्बाइन फ्यूल को जीएसटी के दायरे में लाने पर विचार किया था। पेट्रोल कई राज्यों में सौ रुपए के पार बिक रहा है। इसमें से करीब 60 फीसदी टैक्स के रूप में जाता है।

काउंसिल का फैसला हाई कोर्ट को बताएंगे
केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि पेट्रोल-डीजल का मुद्दा केरल हाई कोर्ट के ऑर्डर पर बैठक के एजेंडे में आया। बैठक में तय हुआ कि काउंसिल को यह बात केरल हाई कोर्ट को बतानी चाहिए कि इस मामले पर चर्चा हुई और काउंसिल ने महसूस किया कि पेट्रोल-डीजल को जीएसटी में लाने का यह सही समय नहीं है।

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महत्वपूर्ण दवाओं पर जीएसटी नहीं

स्विगी और जोमैटो के लिए बदला टैक्स का तरीका
जीएसटी काउंसिल की बैठक में ऑनलाइन खाना उपलब्ध करवाने वाली सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए भी बदलाव किया गया है। स्विगी और जोमैटो जैसी खाना पहुंचाने वाली सेवाओं के लिए अब ऑडर्स के हिसाब से कर वसूली होगी। पुराने टैक्स में कोई बदलाव नहीं किया गया है। तरीका बदलकर टैक्स लिया जाएगा। रेस्टोरेंट्स से टैक्स लेने की जगह जो सेवा प्रदाता है, अब वह टैक्स देगा।