
जीएसटी की जो चार दरें घोषित की हैं, वे असल में पांच दरें हैं। पहली दर 0 फीसदी है, जिसमें उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की आधी वस्तुएं शामिल हैं। ये वह वस्तुएं हैं, जिन्हें आम आदमी उपयोग करता है। इनमें से आधे वस्तुओं पर 0 फीसदी टैक्स लगाया गया है, ये अच्छी बात है।
लेकिन सूचकांक की शेष आधी वस्तुओं पर 5% टैक्स लगेगा या 12% या 18% टैक्स लगेगा? इसे लेकर कोई स्पष्टता नहीं है। अगर इन आधी में से अधिकतर वस्तुएं 12 या 18% के स्लैब में गईं तो इससे भयंकर महंगाई बढ़ेगी। जैसे कि कपड़े पर फिलहाल पूरे देश में 7 से 8% कुल टैक्स लगता है।
लेकिन जीएसटी में ये या तो 12 फीसदी के स्लैब में आएगा या 18 फीसदी के स्लैब में। इसका असर आम उपभोक्ता पर पड़ेगा। दूसरा, जिन उत्पादों पर उपकर के जरिए वर्तमान टैक्स का स्तर बनाए रखने की बात कही गई है। इससे कई उत्पादों पर उपकर कर से भी अधिक हो जाएगा, यह एक विरोधाभास को जन्म देगा।
इसी तरह, सोने के आभूषणों पर टैक्स की दर पर फिलहाल भले ही कोई फैसला न हुआ हो, लेकिन यह तो तय ही है कि इस पर 0 फीसदी टैक्स नहीं लगेगा। यानी इस पर कम से कम 5 फीसदी टैक्स लगेगा, जो कि वर्तमान 1 फीसदी से पांच गुना अधिक होगा।
इससे भी ज्वेलर्स में आक्रोश भड़केगा। जहां तक बात सेवाकर की है यदि इसकी दर 18% रही तो इसकी मार हर आदमी पर पडऩा तय है, क्योंकि मोबाइल पर बात करने से लेकर, रेस्टोरेंट में खाना खाने तक हर कोई सेवाकर का भुगतान करता है।
Published on:
04 Nov 2016 09:40 am
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