Income Tax Relief : अगर ब्याज पहले ही चुका दिया गया है तो भी आवेदन किया जा सकता है और आदेश के अनुसार रिफंड भी मिल सकता है।
Income Tax ने आयकर दाताओं को बड़ी राहत दी है। अब अगर आयकर दाता ने टैक्स कटौती (TDS) या टैक्स कलेक्शन (TCS) तय समय पर शुरू कर किया है, लेकिन तकनीकी गड़बड़ी आ जाने के कारण सरकारी खाते में रकम समय पर नहीं पहुंची तो उस पर लगने वाला अतिरिक्त ब्याज माफ किया जा सकता है। यह राहत Income Tax Act की उन धाराओं के तहत मिल रही है, जो टैक्स की समय पर कटौती और सरकार के खाते में जमा नहीं होने पर ब्याज लगाती हैं। ये धाराएं हैं-201(1A)(ii) और 206C(7)।
आयकर विभाग को बड़ी संख्या में ऐसी शिकायतें मिली थीं, जिनमें आयकर दाताओं ने कहा था कि उन्होंने TDS या TCS की रकम तय समय से पहले अपने बैंक से डेबिट करवा दी थी, लेकिन टेक्निकल गड़बड़ी के कारण वह रकम सरकारी खाते में समय से नहीं पहुंची। इसलिए उन पर ब्याज लगाया गया। अब CBDT ने इस तरह के मामलों में राहत दी है। अगर भुगतान का पैसा बैंक अकाउंट से कट गया था तो टेक्निकल कारणों से देरी पर ब्याज नहीं लगेगा।
यह राहत सभी तरह के करदाताओं, TDS डिडक्टर्स और TCS कलेक्टर्स को मिल सकती है, जिन्होंने लास्ट डेट से पहले टैक्स भुगतान प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन तकनीकी गड़बड़ी के कारण रकम समय से सरकारी खाते में नहीं पहुंची और इस कारण ब्याज का नोटिस उन्हें मिला।
जिन करदाताओं को ऐसा नोटिस मिला है वह 1 साल के भीतर आवेदन कर सकते हैं।
उदाहरण: अगर ब्याज वित्त वर्ष 2024-25 के लिए है तो आवेदन 31 मार्च 2026 तक किया जा सकता है। यह आवेदन संबंधित मुख्य आयुक्त (CCIT), महानिदेशक (DGIT) या प्रधान मुख्य आयुक्त (PrCCIT) को करना होगा। अधिकारी आवेदक को सुनवाई पर बुलवाएंगे और बैंक या डिपार्टमेंट ऑफ सिस्टम्स से तकनीकी गड़बड़ी की पुष्टि के बाद स्पीकिंग ऑर्डर पास करेंगे। अगर ब्याज पहले ही भरा गया है तो भी आवेदन किया जा सकता है और आदेश के अनुसार रिफंड भी मिल सकता है। सभी आवेदन 6 महीने के भीतर निपटाए जाएंगे।
1 जुलाई 2025 को CBDT ने एक और सर्कुलर जारी कर बताया है कि यह सुविधा सर्कुलर जारी होने से पहले के मामलों पर भी लागू होगी। अधिकारी सर्कुलर जारी होने की तारीख के बाद से आदेश पारित कर सकते हैं। यह राहत पहले की तारीखों में दी जा सकती है, बशर्ते कि आवेदन समय पर किया गया हो।