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खुशखबरी! सस्ते होंगे लोन और घटेगी EMI, इस हफ्ते मिल सकती है राहत

इस हफ्ते आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में रेपो रेट में 0.50% तक की कटौती की उम्मीद जताई जा रही है। अगर यह होती है, तो जनता को सीधा फायदा मिलेगा—बैंक लोन सस्ते होंगे और होम, ऑटो व पर्सनल लोन की EMI घटेगी।

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लोन होगा सस्ता, ईएमआई घटेगी! रेपो रेट में इस हफ्ते कटौती होने की उम्मीद (प्रतीकात्मक फोटो)

Repo Rate: भारत में इस हफ्ते कर्ज सस्ता होने की उम्मीद है। एसबीआई, क्रिसिल सहित तमाम एजेंसियों का अनुमान है कि 6 जून को आरबीआई की एमपीसी बैठक में रेपो रेट में 0.25 से 0.50 प्रतिशत तक की कटौती होने का अनुमान है। एसबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक इस हफ्ते रेपो रेट में आधा प्रतिशत की कटौती कर सकता है। यह कदम भारतीय अर्थव्यवस्था को नए सिरे से बढ़ावा देने के लिए जरूरी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस कटौती के बावजूद महंगाई नियंत्रण में रह सकेगी और आर्थिक ग्रोथ को भी बढ़ावा मिलेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि बैंकिंग सेक्टर में ब्याज दरों के बदलाव को और प्रभावी बनाने के लिए कुछ नई नीतियां और नियम लागू करने की जरूरत है। इससे बैंकिंग सिस्टम की स्थिरता और भी मजबूत होगी।

ग्लोबल हालात चिंताजनक

एसबीआई की रिपोर्ट में कहा गया कि दुनियाभर की अर्थव्यवस्था धीमी गति से बढ़ रही है। चीन की आर्थिक वृद्धि मंद पड़ रही है। चीन के सामने रियल एस्टेट संकट, सरकारी वित्तीय दबाव और उपभोक्ता विश्वास में कमी जैसी चुनौतियां हैं। वहीं अमरीका में वित्तीय घाटा बढ़ गया है, महंगाई भी बढऩे की आशंका है। कर्ज लगातार बढ़ रहा है। अमरीका की यह स्थिति वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए भी चिंता का विषय बनी हुई है। हालांकि भारत की स्थिति बेहतर बनी हुई है।

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एजेंसियों को कितनी कटौती की उम्मीद

संस्था संभावित कटौती

एसबीआई 0.50 प्रतिशत
बैंक ऑफ अमेरिका 0.25 प्रतिशत
बार्कलेज 0.25 प्रतिशत
इक्रा 0.25 प्रतिशत
क्रिसिल 0.25 प्रतिशत
आईसीआईसीआई 0.25 प्रतिशत
बैंक ऑफ बड़ौदा 0.25 प्रतिशत

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भारत में घटेगी महंगाई

देश में इस साल मानसून अच्छा रहने की उम्मीद है, जिससे दाल, सब्जियां और अन्य खाद्य सामग्री की कीमतों में स्थिरता बनी रहेगी। इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतें भी कम बनी हुई हैं, जो महंगाई को बढ़ने से रोकने में मदद कर रही हैं। इस वजह से विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस वित्त वर्ष के अंत तक महंगाई दर लगभग 3.5 प्रतिशत के आसपास रह सकती है।