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Mutual Funds: गिरते बाजार में भी स्मॉलकैप फंड्स में हो रहा तगड़ा निवेश, उधर एक यह बड़ी चिंता भी सता रही

Mutual Funds Tips: स्मॉलकैप फंड सेगमेंट में एक्सपर्ट फंड मैनेजर्स की काफी कमी है। कई अनुभवी मैनेजर अब खुद की पीएमएस कंपनियां शुरू कर रहे हैं।

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भारत

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Pawan Jayaswal

Apr 06, 2026

Mutual Funds

स्मॉलकैप फंड्स में अच्छा निवेश आ रहा है। (PC: AI)

Mutual Funds Tips: शेयर बाजार में भारी उठापटक के बीच लॉन्ग टर्म में ऊंचे रिटर्न की उम्मीद से निवेशकों का स्मॉलकैप फंड से मोहभंग नहीं हो रहा है। लेकिन इस सेगमेंट में विशेषज्ञ फंड मैनेजरों की भारी कमी है। इसके कारण कई फंड हाउस में एक ही मैनेजर स्मॉलकैप व लार्जकैप दोनों फंड संभाल रहे हैं। 40% एएमसी में लार्जकैप संभालने वाले फंड मैनेजर ही स्मॉलकैप को भी मैनेज कर रहे हैं। 34 में से 11 फंड हाउस में चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर (सीआइओ) ही स्मॉलकैप फंड्स को मैनेज कर रहे हैं, जबकि उनका काम पूरे निवेश पोर्टफोलियो की रणनीति देखना होता है।

खुद ही शुरू कर रहे PMS कंपनियां

कई अनुभवी मैनेजर अब खुद की पीएमएस (पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विस) कंपनियां शुरू कर रहे हैं, जिससे म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में टैलेंट की कमी बढ़ रही है। पिछले तीन वर्षों में निवेशकों ने स्मॉलकैप फंड्स में 1.35 लाख करोड़ रुपए से अधिक निवेश किया। इनका एयूएम दोगुना होकर 3.65 लाख करोड़ रुपए और निवेशकों की संख्या 2.8 करोड़ से ज्यादा है। लेकिन इन योजनाओं को संभालने के लिए जरूरी विशेष कौशल वाले फंड मैनेजरों की संख्या सीमित है। इससे सवाल उठ रहा है कि क्या निवेशकों का पैसा सही विशेषज्ञता के साथ मैनेज हो रहा है?

किन स्थितियों में अच्छा

कंट्रोल : सीआइओ पूरे एएमसी की निवेश रणनीति तय करता है। अगर वही व्यक्ति फंड भी मैनेज कर रहा है, तो फंड की दिशा स्पष्ट और कंसिस्टेंट रहती है।

एक्सपर्टाइज : सीआइओ आमतौर पर सबसे अनुभवी निवेश प्रोफेशनल होता है। वे शॉर्ट टर्म दबाव से कम प्रभावित होते हैं और लॉन्ग टर्म वैल्यू क्रिएशन पर ध्यान देते हैं।

रिसर्च: सीआइओ के पास पूरी रिसर्च टीम होती है, जिससे बेहतर स्टॉक सिलेक्शन और गहरी एनालिसिस में मदद मिलती है।

जोखिम भी बन सकता है

निर्भरता: फंड एक ही व्यक्ति पर निर्भर है, तो उसके जाने या गलत फैसले से रिटर्न पर बड़ा असर पड़ सकता है।
ओवरलोड: सीआईओ को कई फंड्स और टीम संभालनी होती है। इससे किसी एक फंड पर फोकस कम हो सकता है।
बायस: सीआइओ अपनी बनाई रणनीति को बदलने में हिचक सकता है, भले ही मार्केट की स्थितियां बदल जाएं। गलत फैसलों को चुनौती कम मिलती है।