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बिना पैकिंग व लेबल के इन 14 वस्तुओं पर नहीं लगेगी GST, वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने ट्वीट कर दी जानकारी

लगातार 14 ट्वीट करते हुए वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि बिना पैकिंग व लेबल के इन 14 वस्तुओं की बिक्री पर GST नहीं लगेगी। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि आखिर सरकार ने इन वस्तुओं पर GST लगाने का फैसला क्यों किया।

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Abhishek Kumar Tripathi

Jul 19, 2022

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no gst will be levied on these 14 items when sold loose Finance Minister Nirmala Sitharaman tweeted news in hindi

सोमवार, 18 जुलाई से सरकार ने पैकेज्ड और लेबलयुक्त दूध, दही, दाल, आटा सहित दैनिक यूज होने वाली कई वस्तुओं पर 5% GST लगा दिया है। यह फैसला सरकार के द्वारा जीएसटी परिषद की 47वीं बैठक में लिया है, जिसके बाद कई वस्तुओं की कीमतों में इजाफा हुआ है। इसके कारण गरीब और मध्यम वर्ग परिवारों पर महंगाई का एक और बोझ पड़ गया है। इसके बाद आज वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने लगातार 14 ट्वीट करते हुए बताया कि यह फैसला जीएसटी परिषद की बैठक में लिया गया था, जिसमें गैर भाजपा सरकार वाले राज्यों की भी सहमति थी।

उन्होंने अगला ट्वीट करते हुए कहा कि क्या यह पहली बार है जब इस तरह के खाद्य पदार्थों पर टैक्स लगाया जा रहा है? नहीं, राज्य जीएसटी पूर्व व्यवस्था में खाद्यान्न से महत्वपूर्ण राजस्व एकत्र कर रहे थे। अकेले पंजाब ने खरीद कर के रूप में खाद्यान्न पर 2,000 करोड़ रुपए से अधिक की वसूली की है। वहीं यूपी ने 700 करोड़ रुपए बटोरे हैं।


14 वस्तुओं पर नहीं लगेगी GST

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने ट्वीट के जरिए कहा कि इन खाद्य पदार्थों को बिना पैकिंग व बिना लेबल के बेचने पर GST नहीं लगेगा। इसमें दाल, गेहूं, राई, ओट्स, मकई, चावल, आटा, सूजी, बेसन, मुरमुरे, दही और लस्सी जैसे सामान शामिल हैं।


फिटमेंट कमेटी ने की सिफारिश, ये राज्यों के अधिकारी हुए शामिल
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने ट्वीट करते हुए कहा कि राज्यों द्वारा वसूले जाने वाले कर को ध्यान में रखते हुए GST लागू किया गया था। हालांकि जल्द ही इसका दुरुपयोग देखने को मिला और इन वस्तुओं से GST राजस्व में काफी गिरावट आई, जिसके बाद फिटमेंट कमेटी ने सरकार से इसको रोकने के लिए तौर-तरीकों को बदलने के लिए अपनी सिफारिशें की। इसके बाद यह लागू किया गया है। फिटमेंट कमेटी में राजस्थान, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, बिहार, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, हरियाणा और गुजरात के अधिकारी शामिल थे।