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कैसे ग्राहकों को मिलेगा पूरा रिफंड? ऐसा फ्रॉड होने पर बैंक लेगा पूरी जिम्मेदारी, जानिए RBI के नए नियम

RBI Mis-selling Refund Rules: पिछले कुछ सालों में बैंक के ग्राहकों की शिकायतें सामने आई हैं। इनमें बीमा, म्यूचुअल फंड और अन्य थर्ड पार्टी प्रोडक्ट्स बेचने के दौरान गड़बड़ियों की शिकायतें शामिल हैं। कई मामलों में ग्राहकों ने आरोप लगाया कि उन्हें बिना पूरी जानकारी दिए या दबाव बनाकर प्रोडक्ट्स खरीदने के लिए मजबूर किया […]

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भारत

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Thalaz Sharma

Feb 12, 2026

rbi draft rules

प्रतीकात्मक तस्वीर (PC: AI)

RBI Mis-selling Refund Rules: पिछले कुछ सालों में बैंक के ग्राहकों की शिकायतें सामने आई हैं। इनमें बीमा, म्यूचुअल फंड और अन्य थर्ड पार्टी प्रोडक्ट्स बेचने के दौरान गड़बड़ियों की शिकायतें शामिल हैं। कई मामलों में ग्राहकों ने आरोप लगाया कि उन्हें बिना पूरी जानकारी दिए या दबाव बनाकर प्रोडक्ट्स खरीदने के लिए मजबूर किया गया। अब इस पर सख्त रुख अपनाते हुए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने ड्राफ्ट नियम जारी कर दिए हैं, जिनके तहत मिस सेलिंग, यानी गलत तरीके से कुछ बेचना, साबित होने पर बैंक को पूरा रिफंड देना होगा।

मिस सेलिंग पर सख्ती और रिफंड नियम

नए प्रस्तावित नियमों के अनुसार यदि किसी ग्राहक की शिकायत में यह साबित हो जाता है कि उसे गलत तरीके से कोई फाइनेंशियल प्रोडक्ट बेचा गया है, तो संबंधित बैंक को पूरी राशि लौटानी होगी। इसके अलावा, ग्राहक को हुए नुकसान की भरपाई भी करनी होगी। RBI ने स्पष्ट किया है कि बैंक अपनी आंतरिक नीतियों में ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करें जिससे अनुचित बिक्री की घटनाएं रोकी जा सकें। ग्राहकों को शर्तों और जोखिम की पूरी जानकारी देना अनिवार्य होगा।

RBI ने यह भी कहा है कि बैंक किसी थर्ड पार्टी प्रोडक्ट को अपने प्रोडक्ट की तरह प्रमोट नहीं कर सकते। यदि बैंक का कोई प्रोडक्ट किसी अन्य सेवा से जुड़ा है, तो ग्राहक को विकल्प देना होगा कि वह थर्ड पार्टी प्रोडक्ट किसी अन्य प्रदाता से भी खरीद सके।

डिजिटल प्लेटफॉर्म और डार्क पैटर्न पर रोक

डिजिटल बैंकिंग और मोबाइल ऐप के बढ़ते उपयोग को देखते हुए RBI ने डार्क पैटर्न पर भी सख्ती की है। बैंकों को निर्देश दिया गया है कि वे अपनी वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर ऐसे डिजाइन या मैसेज का उपयोग न करें जो ग्राहक को भ्रमित करें। फर्जी अर्जेंसी, कन्फर्म शेमिंग, सब्सक्रिप्शन ट्रैप जैसे तरीके पूरी तरह प्रतिबंधित होंगे।

बैंक को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रोडक्ट बेचने से पहले ग्राहक की आयु, आय, निवेश अवधि, जोखिम क्षमता और फाइनेंशियल समझ का आकलन किया जाए। इसके अलावा, बिक्री के 30 दिनों के भीतर ग्राहक से फीडबैक लेना अनिवार्य होगा ताकि यह पता चल सके कि उसने प्रोडक्ट की शर्तें सही तरीके से समझी हैं या नहीं।

सेल्स टारगेट और एजेंट्स के लिए नियम

RBI के ड्राफ्ट में डायरेक्ट सेलिंग एजेंट्स और मार्केटिंग टीमों के लिए भी स्पष्ट गाइडलाइन दी गई हैं। सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे के बीच ही टेलीफोन कॉल या विजिट की अनुमति होगी, जब तक कि ग्राहक की सहमति न हो। सभी एजेंट्स को स्पष्ट पहचान पत्र रखना होगा और बैंक को उनके लिए आचार संहिता बनानी होगी।

​कब लागू होंगे ये नियम?

थर्ड पार्टी कंपनियों द्वारा बैंक कर्मचारियों को दिए जाने वाले इंसेंटिव पर भी रोक का प्रस्ताव है। सेल्स टारगेट के नाम पर ग्राहकों पर दबाव बनाने की प्रवृत्ति खत्म करने पर जोर दिया गया है। ये नियम 1 जुलाई 2026 से लागू हो सकते हैं और ड्राफ्ट पर सुझाव 4 मार्च 2026 तक आमंत्रित किए गए हैं।