
सरकार सस्ती कीमत पर प्याज बेचेगी। (PC: AI)
Kanda Express Train: प्याज की बढ़ती कीमतों से परेशान दिल्ली-एनसीआर के लोगों को जल्द राहत मिल सकती है। केंद्र सरकार ने 35 रुपये प्रति किलो की दर से प्याज बेचने का फैसला किया है। इसके लिए महाराष्ट्र के नासिक से विशेष मालगाड़ियों के जरिए प्याज दिल्ली पहुंचाया जाएगा। सरकार की यह पहल ऐसे समय हुई है जब देशभर में प्याज के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। एनडीटीवी की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NCCF) इस हफ्ते के अंत तक दिल्ली और आसपास के इलाकों में सस्ता प्याज बेचना शुरू कर सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआत में NCCF दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में अपने 10 रिटेल आउटलेट के जरिए 35 रुपये किलो की दर से प्याज बेचने की तैयारी कर रहा है। इसके अलावा NCCF की ओर से संचालित 105 भारत ब्रांड स्टोर्स पर भी इसी कीमत पर प्याज उपलब्ध कराया जाएगा। हालांकि, बिक्री शुरू होने के लिए नासिक से प्याज लेकर चलने वाली विशेष 'कांदा एक्सप्रेस' ट्रेन का दिल्ली पहुंचना जरूरी है। सूत्रों के अनुसार पहली ट्रेन बुधवार या गुरुवार तक राष्ट्रीय राजधानी पहुंच सकती है। ट्रेन के पहुंचते ही प्याज की सप्लाई और बिक्री शुरू होने की उम्मीद है।
सरकार ने प्याज के बफर स्टॉक से शुरुआती सप्लाई के लिए पांच बड़े खपत केंद्रों की पहचान की है। उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने बताया कि पहले चरण में चेन्नई, मदुरै, दिल्ली, एर्नाकुलम और गुवाहाटी को प्याज भेजा जाएगा। उन्होंने न्यूज एजेंसी PTI से कहा कि आगे बाजार की जरूरत को देखते हुए दूसरे शहरों को भी इस योजना में शामिल किया जा सकता है। यानी जहां प्याज की कीमतों का दबाव ज्यादा होगा, वहां सरकारी स्टॉक से सप्लाई बढ़ाने का फैसला लिया जा सकता है।
प्याज के दाम में अचानक आई तेजी ने सरकार की चिंता बढ़ाई है। 24 अगस्त को देश में प्याज की औसत खुदरा कीमत 43.53 रुपये प्रति किलो पहुंच गई। पिछले साल इसी दिन यह कीमत 27.37 रुपये प्रति किलो थी। यानी एक साल में औसत खुदरा भाव करीब 59% बढ़ गया। थोक बाजार में भी हालात कुछ अलग नहीं हैं। औसत थोक कीमत सालाना आधार पर 68% बढ़कर 35.58 रुपये प्रति किलो हो गई है। एक साल पहले यह 21.23 रुपये प्रति किलो थी।
बड़े शहरों की बात करें तो सोमवार को चेन्नई में प्याज 60 रुपये किलो तक बिक रहा था, जबकि पिछले साल भाव 33 रुपये था। दिल्ली में कीमत 55 रुपये किलो पहुंच गई, जो एक साल पहले 35 रुपये थी। कोलकाता में प्याज का भाव 53 रुपये किलो दर्ज किया गया।
प्याज की कीमतों में अचानक उछाल आने पर सरकार बफर स्टॉक का सहारा लेती है। इसे एक तरह के रणनीतिक भंडार के तौर पर रखा जाता है, ताकि बाजार में सप्लाई कम होने पर सरकारी स्टॉक से प्याज निकालकर कीमतों पर दबाव कम किया जा सके। इस स्टॉक के लिए प्याज की खरीद मुख्य रूप से NCCF और NAFED जैसी एजेंसियों के जरिए की जाती है। प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड के तहत तैयार किए गए इस भंडार से जरूरत के हिसाब से प्याज मंडियों और खुदरा बाजार में भेजा जाता है। सरकार एक साथ पूरा स्टॉक बाजार में नहीं उतारती। मांग, सप्लाई और कीमतों की स्थिति देखकर अलग-अलग जगहों पर जरूरत के मुताबिक प्याज भेजा जाता है।
अगस्त और सितंबर में प्याज की कीमतों में तेजी अक्सर देखने को मिलती है। इस दौरान त्योहारों की मांग बढ़ने के साथ मौसम की मार, सप्लाई में रुकावट और बाजार में आवक में बदलाव का असर भी कीमतों पर पड़ता है। इसी वजह से उपभोक्ता मामलों का मंत्रालय बफर स्टॉक से प्याज निकालकर प्रमुख खपत वाले शहरों में भेजता है। एक तरफ थोक मंडियों में सप्लाई बढ़ाई जाती है, तो दूसरी तरफ सरकारी और भारत ब्रांड स्टोर्स के जरिए सीधे ग्राहकों तक सस्ता प्याज पहुंचाने की कोशिश होती है।
Updated on:
25 Aug 2026 02:26 pm
Published on:
25 Aug 2026 02:26 pm
