
नई दिल्ली। घरेलू बाजार में तेल की कीमतों में बड़े पैमाने पर बढ़ोतरी के बाद केंद्र सरकार के पाम ऑयल ( Palm Oil ) के आयात शुल्क ( Import Duty ) को घटा दिया था। इसके बावजूद खाद्य तेलों की कीमतें कम होने के बजाय बढ़ी हैं। ताजा अपडेट के मुताबिक घरेलू बाजार में इसकी कीमतें पहले की तुलना में 6 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ गई है। इस बारे में पाम ऑयल कारोबार से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि भारत दुनिया में पाम तेल का सबसे बड़ा आयातक है। भारत से ज्यादा मांग आने की उम्मीद में वैश्विक बाजार में इसकी कीमतें बढ़ गई हैं।
कीमत बढ़कर हुई 1055 डॉलर प्रति टन
आयात शुल्क में कमी का फैसला लेने के बाद भारत में पहुंचने के बाद क्रूड पाम ऑयल (Crude palm oil) की कीमत बढ़कर 1085 डॉलर प्रति टन हो गई है। 29 जून को यह कीमत 1,020 डॉलर प्रति टन थी। जबकि पिछले कुछ दिनों में रिफाइंड पाम ऑयल की कीमत 1,020 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 1,055 डॉलर प्रति टन हो गई है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। जब भी भारत आयात शुल्क में कटौती करता है, वैश्विक बाजार में इसकी कीमतें बढ़ जाती हैं।
30 जून को दी थी आयात की मंजूरी
केंद्र सरकार ने 29 जून को तीन महीने के लिए क्रूड पाम ऑयल (CPO) पर आयात शुल्क 5 फीसदी तक घटा दिया था। इसके बाद से मलेशियाई पॉम तेल फ्यूचर्स में 6 फीसदी उछाल आया है। सरकार ने 30 जून को रिफाइंड पाम ऑयल के आयात की भी मंजूरी दी थी। दरअसल, वैश्विक बाजार में पाम तेल की कीमतों में उछाल का असर भारत में इसकी मांग पर पड़ सकता है। ऐसे में भारत सरकार आयात शुल्क में और कमी करने से बचेगी।
Updated on:
19 Jul 2021 06:53 pm
Published on:
19 Jul 2021 06:44 pm
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