
कभी 'सोने की चिडिय़ा' कहा जाने वाला भारत धीरे-धीरे फिर से अपनी खोई प्रतिष्ठा हासिल करने की ओर बढ़ रहा है। लगभग 300 साल पहले दुनिया की एक चौथाई से ज्यादा जीडीपी भारत के हिस्से में थी, लेकिन भारतीय उपमहाद्वीप पर ब्रिटिश हुकूमत के आने के बाद इसमें गिरावट की शुरुआत हो गई। पिछले कुछ सालों में भारत की जीडीपी में फिर से सुधार देखने को मिल रहा है। अबरदीन एसेट मैनेजमेंट की रिपोर्ट 'इंडिया: द जायंट अवेकंस' में आगे भी तेजी से सुधार की संभावना जताई है।
दुनिया के सबसे बड़े फंड्स में शुमार अबरदीन ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि भारत की आर्थिक प्रगति अभूतपूर्व लग रही है, लेकिन वास्तव में भारत अपनी सदियों पुरानी प्रतिष्ठा को हासिल करने की ओर बढ़ रहा है। पिछले दो हजार सालों में भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक 17वीं सदी मेंअकबर ने करीब 155.29 करोड़ रुपए सालाना राजस्व जुटाया था। उस समय करीब 200 साल तक वैश्विक जीडीपी में भारत का हिस्सा करीब 25 फीसदी रहा था।
रिपोर्ट में मोदी की जमकर हुई तारीफ
औपनिवेशिकरण के समय शुरू हुई गिरावट 1970 के दशक के अंत तक जारी रही। हालांकि 1991 के बाद आर्थिक उदारीकरण के चलते इसमें लगातार सुधार देखने को मिला है। अबरदीन ने अपनी रिपोर्ट में पीएम मोदी की जमकर तारीफ करते हुए भारत की तेज आर्थिक प्रगति की संभावना जताई। रिपोर्ट के अनुसार, 'मोदी ने रटे-रटाए नियमों से हटकर काम किया है। रिपोर्ट में इन्फ्रास्ट्रक्चर और विनिर्माण के क्षेत्र में सुधार की गुंजाइश भी बताई। रिपोर्ट में कहा, कई लोगों को लगता है कि सुधार प्रक्रिया अटकी हुई है। मोदी की लोकप्रियता दबाव में है, लेकिन असल में ऐसा नहीं है।'
सुनहरे दौर की वापसी
लंबे उतार-चढ़ाव के बाद भारत फिर से अपनी खोई प्रतिष्ठा हासिल करने की ओर बढ़ रहा है। जीडीपी में तेजी से सुधार हो रहा है।
'मेक इन इंडिया का हुआ असर'
रिपोर्ट के मुताबिक सरकार की 'मेक इन इंडिया' की पहल का असर शुरू हो गया है। 2015 में एफडीआई का पिछले साल की तुलना में 24 फीसदी बढऩा इसका उदाहरण है। साथ ही रिपोर्ट में जीएसटी, पर्यावरणीय मंजूरी में आसानी और स्मार्ट सिटी का भी जिक्र हुआ है।
Published on:
25 Aug 2016 08:02 am
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