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AC, TV, EV, मोबाइल और लैपटॉप होने वाले हैं महंगे, क्यों लगेगी कीमतों में आग?

AC Price Hike: बीते एक साल में तांबे की कीमत में 60 फीसदी का इजाफा हो चुका है। उधर एआई सेक्टर के उभरने से मेमोरी चिप्स की मांग तेजी से बढ़ रही है।

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भारत

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Pawan Jayaswal

Jan 16, 2026

AC Price Hike:

कॉपर की कीमतों में काफी तेजी आई है। (PC: AI)

AC Price Hike: अगर आप आने वाले गर्मियों के सीजन में एसी खरीदने का सोच रहे हैं, तो आपको ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। यही नहीं, स्मार्टफोन, टीवी, लैपटॉप और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की कीमतें भी बढ़ने की उम्मीद हैं। वायरिंग, कॉइल और केबल्स के लिए बेहद जरूरी मेटल कॉपर की कीमत बीते एक साल में करीब 60 फीसदी तक बढ़ चुकी है। इसका सीधा असर घरेलू उपकरणों की लागत पर पड़ रहा है। कई इंडस्ट्रीज पहले से ही इस महंगाई का दबाव महसूस कर रही हैं।

क्यों महंगा हो रहा कॉपर?

बीते 12 महीनों में तांबे की कीमतें करीब 60% बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। इसकी बड़ी वजह यह है कि एक साथ कई सेक्टर्स से डिमांड तेज हो गई है। इलेक्ट्रिक व्हीकल्स में पेट्रोल या डीजल गाड़ियों की तुलना में तीन से चार गुना ज्यादा तांबा लगता है। रिन्यूएबल एनर्जी सिस्टम्स को बैटरी स्टोरेज की जरूरत होती है, जो तांबा-आधारित तकनीक पर निर्भर है। तांबा एयर कंडीशनर जैसे कूलिंग प्रोडक्ट्स के निर्माण में भी एक अहम कच्चा माल है।

कीमतों में बढ़ोतरी का दूसरा बड़ा कारण दुनिया के बड़े कॉपर माइनिंग क्षेत्रों से सप्लाई का बाधित होना है। भू-राजनीतिक तनाव और टैरिफ भी कीमतों में बढ़ोतरी की वजह है। इन सब कारणों से कॉपर की उपलब्धता घट गई है, जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ गया है।

बढ़ रही इनपुट कॉस्ट

कॉपर घरेलू उपकरणों, इलेक्ट्रॉनिक्स, EVs और पावर ग्रिड्स का अहम हिस्सा है। जैसे-जैसे इनपुट कॉस्ट बढ़ रही है, मैन्युफैक्चरर्स का मार्जिन घट रहा है, जिससे उन्हें कीमतें बढ़ानी पड़ रही हैं। AC और EV कंपनियों को वायरिंग और बैटरी की लागत ज्यादा चुकानी पड़ रही है। रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स में खर्च बढ़ रहा है। डेटा सेंटर्स और AI इंफ्रास्ट्रक्चर, जो भारी मात्रा में तांबे की वायरिंग पर निर्भर हैं, उनकी लागत भी तेजी से बढ़ रही है

कंस्ट्रक्शन और रियल एस्टेट सेक्टर पर भी असर

कंस्ट्रक्शन और रियल एस्टेट सेक्टर में भी लागत बढ़ रही है। वहां प्लबिंग और इलेक्ट्रिकल काम में कॉपर का इस्तेमाल होता है। इसके अलावा, एनर्जी, टेक्नोलॉजी और कंज्यूमर गुड्स जैसे सेक्टर्स में लागत बढ़ रही है, जिससे ग्रीन टेक्नोलॉजी को अपनाने की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।

मेमोरी चिप्स की बढ़ती मांग से इंडस्ट्री परेशान

उधर मेमोरी चिप्स की बढ़ती मांग से इंडस्ट्री परेशान है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के अनुसार, आने वाले दो महीनों में स्मार्टफोन, टीवी और लैपटॉप की कीमतों में 4 से 8 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है। यह बढ़ोतरी नवंबर-दिसंबर में पहले हुई 21 फीसदी तक की तेज महंगाई के अलावा होगी। AI और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग को तेजी से अपनाए जाने के कारण मेमोरी चिप्स की मांग बढ़ी है, जिससे उनकी कीमतें ऊपर जा रही हैं।

पूरे साल जारी रह सकती है महंगाई

इंडस्ट्री के अधिकारियों का मानना है कि कीमतों में ऐसी बढ़ोतरी इस पूरे साल हर तिमाही या यहां तक कि हर महीने सामान्य बात बन सकती है। पिछली तिमाही में जहां मेमोरी चिप्स की कीमतों में करीब 50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी, वहीं मौजूदा तिमाही में इसमें 40 से 50 फीसदी की और तेजी आने की उम्मीद है। इसके बाद अप्रैल-जून तिमाही में भी 20 फीसदी तक की बढ़ोतरी का अनुमान है।

महंगे हो रहे मोबाइल

कुछ स्मार्टफोन ब्रांड्स ने जनवरी में ही 3 से 5 हजार रुपये तक कीमतें बढ़ा दी हैं। जबकि कुछ ब्रांड्स कैशबैक और डिस्काउंट कम करने जैसे अप्रत्यक्ष तरीकों से कीमतों में बढ़ोतरी कर रहे हैं।