RBI शुरू करेगा टोकन व्यवस्था, धोखाधड़ी से मिलेगी ग्राहकों को सुरक्षा

रिजर्व बैंक ने कार्ड से भुगतान के नए नियम जारी किए, एक जनवरी 2022 से लागू होंगे।

By: सुनील शर्मा

Published: 09 Sep 2021, 12:23 PM IST

नई दिल्ली। क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड से भुगतान करना अगले वर्ष से ज्यादा सुरक्षित हो जाएगा। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कार्ड से भुगतान के नए नियम जारी किए हैं, जो एक जनवरी 2022 से लागू हो जाएगा। ऑनलाइन पेमेंट के लिए टोकन सिस्टम होगा। रिजर्व बैंक ने टोकन व्यवस्था के दायरे में लैपटॉप, डेस्कटॉप, स्मार्ट वॉच और इंटरनेट ऑफ थिंग्स आधारित उत्पादों को शामिल किया है।

आरबीआई के मुताबिक, टोकन व्यवस्था का मकसद भुगतान प्रणाली को और अधिक सुरक्षित बनाना है। इस व्यवस्था के तहत, भुगतान के लिए ग्राहक को कोड का पूरा विवरण नहीं देना होगा, बल्कि इसके लिए एक विशेष कोड सृजित होगा। टोकन एक यूनिक कोड होगा। इसका फायदा यह होगा कि ई-कॉमर्स वेबसाइट पर शॉपिंग के बाद पेमेंट के लिए ग्राहकों को 16 अंको का क्रेडिट-डेबिट कार्ड नंबर नहीं डालना होगा, उसकी जगह टोकन नंबर डालना होगा।

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एग्रीगेट कर सकेंगे सीमित डेटा स्टोर
क्रेडिट-डेबिट कार्ड के जरिए ट्रांजेक्शन में कार्ड जारी करने वाले बैंक या कार्ड नेटवर्क के अलावा कोई अन्य वास्तविक कार्ड डेटा स्टोर नहीं कर सकेगा। ट्रांजेक्शन ट्रैकिंग या विवाद की स्थिति में समझौते के लिए पेमेंट एग्रीगेटर सीमित डेटा स्टोर कर सकेंगे। वास्तविक कार्ड नंबर और कार्ड जारीकर्ता के नाम के आखिरी 4 अंक तक स्टोर करने की छूट होगी।

वैकल्पिक रहेगी व्यवस्था
रिजर्व बैंक के अनुसार, टोकन व्यवस्था ग्राहकों की इच्छा पर निर्भर करेगी। इसे लेने के लिए ग्राहकों पर कोई दबाव नहीं बनाया जाएगा। ग्राहक पर इसके लिए बैंक या कार्ड जारी करने वाली कंपनी दबाव नहीं बनाएगी। ग्राहक इस व्यवस्था के तहत डेली ट्रांजेक्शन की लिमिट भी तय कर सकते हैं।

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टोकन सिस्टम के फायदे

  • टोकन सिस्टम लागू होने के बाद स्टोर संचालक ग्राहक के डेबिट-क्रेडिट कार्ड का विवरण अपने पास स्टोर नहीं कर सकेंगे। इससे ग्राहकों की डेटा प्राइवेसी कायम रहेगी।
  • कार्ड की डिटेल्स किसी भी थर्ड पार्टी ऐप के जरिए शेयर नहीं करनी पड़ेगी, ग्राहकों के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी का खतरा काफी कम हो जाएगा।
  • ग्राहकों के पास खुद को कॉन्टेक्टलेस, क्यूआर कोड या इन-ऐप परचेज जैसी किसी भी सर्विस के लिए रजिस्टर और डी-रजिस्टर करने का अधिकार होगा।
  • टोकनाइज्ड कार्ड ट्रांजेक्शन के माध्यम से होने वाले लेनदेन के लिए ग्राहक हर ट्रांजेक्शन की लिमिट के साथ-साथ डेली ट्रांजेक्शन लिमिट भी तय कर सकते हैं।
  • इस टोकनाइज्ड पेमेंट सिस्टम में भाग लेने वाली सभी कंपनियों को रिजर्व बैंक के साथ रजिस्टर्ड होना जरूरी होगा और ग्राहकों की भी मंजूरी लेनी होगी।
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सुनील शर्मा
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