
रुपए (Photo-X)
सोमवार को भारतीय रुपया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी और मीडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण भारतीय रुपए की स्थिति बाजार में कमजोर हो रही है। शुक्रवार को रुपया 91.74 पर बंद हुआ था।
सोमवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 46 पैसे की गिरावट के साथ 92.20 के स्तर पर खुला। इसके थोड़ी ही देर बाद रुपये में गिरावट और बढ़ गई, जिससे यह 56 पैसे की गिरावट के साथ 92.49 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। हाल ही के महीनों में यह एक दिन में सबसे तेज गिरावट दर्ज की गई है। जो बाजार के बंद होने और दुबारा खुलने के दौरान हुई है।
रुपये में देखी जा रही इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण ऊर्जा बाजार में मची हुई खलबली है। तेल की कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस वृद्धि का मुख्य कारण अमेरिका और इजराइल का ईरान के साथ संघर्ष है, जिससे मध्य पूर्व के कुछ प्रमुख उत्पादकों ने आपूर्ति कम कर दी है।
क्योंकि भारत कच्चे तेल का आयातक देश है जिसके कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत के आयात खर्च में वृद्धि करती हैं। इससे चालू खाता घाटा बढ़ने की संभावना रहती है और रुपये पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 25 प्रतिशत से अधिक की तेजी देखी गई। इसके बाद यह 114 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। इस युद्ध के कारण पिछले दो हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की जा चुकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की बढ़ती कीमतों के कारण रुपये पर जोखिम बना रहेगा। इसके साथ ही कई एशियाई देशों की मुद्राओं में गिरावट देखी गई। यदि तेल की कीमतों में वृद्धि लगातार बनी रहती है तो रुपये के 93 के करीब पहुंचने की आशंका हो सकती है।
Published on:
09 Mar 2026 11:24 am
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