
ग्लोबल मार्केट्स में तेजी देखी गई है। (PC: AI)
Stock Market Outlook: ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को सीजफायर की अवधि के दौरान सभी के लिए खोल दिया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ऐलान किया है कि होर्मुज को सभी वाणिज्यिक जहाजों के लिए पूरी तरह खोल दिया गया है। यह मार्ग इजरायल लेबनान संघर्ष विराम की शेष अवधि के लिए ही खोला गया है, जो अगले 9 दिन तक प्रभावी रहेंगे। ऐसे में फारस की खाड़ी में फंसे जहाज अब होर्मुज को पार कर अपनी यात्रा पूरी कर सकते हैं।
ईरान के इस ऐलान से कुछ सेकेंड में ही ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 98 डॉलर प्रति बैरल से 12% घटकर 88 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। अमेरिकी क्रूड डब्ल्यूटीआइ तो 83 डॉलर तक फिसल गया। ईरान की इस घोषणा से 5 मिनट से भी कम समय में ग्लोबल शेयर बाजार 1.5% तक उछल गए। क्रूड की कीमतों में गिरावट और होर्मुज से सप्लाई फिर शुरू होने से अमेरिकी बाजार डाउ जोंस में 2% से अधिक की तेजी आई। यूरोपीय बाजार भी 2% चढ़े। गिफ्ट निफ्टी भी 1.75% चढ़कर 24,850 पर पहुंच गया, जिससे सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में गैपअप अपनिंग की उम्मीद है।
चूंकि ईरान ने यह घोषणा एशियाई बाजारों के बंद होने के बाद की, इसलिए ग्लोबल बाजारों की इस तेजी और ईरान के फैसले का असर सोमवार को दिखेगा। पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीद से सेंसेक्स शुक्रवार को 505 अंक चढ़कर 78,493 के ऊपर बंद हुआ था। निफ्टी भी 156 अंक यानी 0.65% तेजी के साथ 24,353 के ऊपर रहा था। निफ्टी स्मॉल कैप 250 इंडेक्स शुक्रवार को 1.48% बढ़ा। निफ्टी मिडकैप 150 भी 1.21% चढ़ा और निफ्टी माइक्रोकैप में 1.2% की तेजी रही। घरेलू निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी से स्मॉल-माइक्रोकैप शेयरों की रिकवरी तेज हुई।
स्मॉल और माइक्रोकैप शेयरों ने पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान आई गिरावट को पूरी तरह पाट दिया है। 27 फरवरी से 30 मार्च के बीच निफ्टी माइक्रोकैप इंडेक्स 11.5% गिरा था, जो अप्रेल में 19% से ज्यादा चढ़कर युद्ध- पूर्व स्तरों से 5.7% ऊपर हैं। वहीं, मार्च में स्मॉलकैप में 10% की गिरावट आई थी, जो अप्रेल 2026 में अब तक 15% से ज्यादा चढ़कर युद्ध - पूर्व स्तरों से 3.51% ऊपर है।
जबकि मिड कैप युद्ध-पूर्व स्तरों के 1% ऊपर है, जो मार्च में 10.5% गिरा था। हालांकि, लार्जकैप (निफ्टी 50) अभी भी 27 फरवरी के स्तर से 3.2 नीचे हैं, जबकि अप्रेल में इंडेक्स 9%
चढ़ा है। सेंसेक्स इस दौरान 9.1% चढ़ा है। ब्लू चिप्स पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं, क्योंकि विदेशी निवेशकों की बिकवाली का जोखिम बना हुआ है। विदेशी निवेशक जिनके पास बड़े शेयरों में अधिक हिस्सेदारी है, संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक 1.68 लाख करोड़ के शेयर बेचे हैं।
Updated on:
18 Apr 2026 10:14 am
Published on:
18 Apr 2026 10:13 am
बड़ी खबरें
View Allकारोबार
ट्रेंडिंग
