
Union Budget 2021: लंबे समय से चल रहे कृषि बिलों के विरोध को देखते हुए केंद्र सरकार किसानों के लिए कई अच्छी योजनाओं की घोषणा कर सकती है। इस बजट में भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास के पथ का निर्धारण किया जाएगा। सभी की निगाहें इस बात पर टिकी होंगी कि सरकार ने अपने ब्रीफकेस में कृषि क्षेत्र के लिए क्या बचा रखा है।
उल्लेखनीय है कि पंजाब और हरियाणा के किसानों ने सितंबर 2020 में संसद में पारित तीन कृषि बिलों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं। सरकार ने किसानों की भरपाई करने और किसान-केंद्रित नीति दिखाने के उपायों को लागू करना शुरू कर दिया है। यह माना जा रहा है कि सरकार ने कृषि क्षेत्र के लिए पहले से ही कई प्लान तैयार कर रखे होंगे। हालांकि सरकार ने कृषि के लिए कई योजनाओं को लागू कर रखा है, जैसे कि पीएम किसान के तहत प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण, खेत मजदूरों के लिए मनरेगा योजना, 1 लाख करोड़ रुपये का कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर निधि, और ब्याज में रियायत।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए 2019-20 के केंद्रीय बजट में, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय को रु 1,30,485 करोड़ आवंटित किए गए, जो अब तक की सबसे अधिक आवंटित राशि है। बजट 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के प्रयास में वित्तीय भार को कम करने और आय के अवसरों को बढ़ाने के लिए योजनाओं पर ध्यान केंद्रित है।
पेस्टीसाइड्स मैन्युफैक्चरर्स एंड फॉर्म्युलेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (PMFAI) ने बुधवार को मांग की है कि आगामी बजट में सरकार कीटनाशकों पर बीज और उर्वरक जैसे अन्य कृषि इनपुट के अनुरूप वर्तमान 18 प्रतिशत से जीएसटी को घटाकर 5 प्रतिशत करें।
इसके अलावा, सरकार को घरेलू कृषि-रसायन उद्योग की सुरक्षा के लिए तकनीकी और समाप्त कीटनाशकों पर आयात शुल्क बढ़ाने के अलावा कीटनाशकों के ड्यूटी ड्राबैक (निर्यात लाभ) को वर्तमान 2 प्रतिशत से बढ़ाकर 13-30 प्रतिशत करना चाहिए।
PMFAI ने सरकार से "मेक इन इंडिया" कार्यक्रम के तहत स्वदेशी रूप से मध्यवर्ती और तकनीकी ग्रेड कीटनाशकों के लिए प्रौद्योगिकियों विकास हेतु एक वित्तीय सहायता और अन्य विकास सहायता का विस्तार करने का आग्रह किया।
Highlights of Union Budget 2019
Fertiliser subsidy:- पिछले वर्ष की तुलना में सब्सिडी कार्यक्रम के लिए बजट आवंटन में लगभग 5000 करोड़ रुपये की वृद्धि की गई है। यूरिया आधारित सब्सिडी में वृद्धि की गई जबकि पोषक तत्वों पर आधारित सब्सिडी काफी हद तक समान रही। इससे सरकार के प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) योजना का समर्थन करते हुए यूरिया आधारित उर्वरक कंपनियों की बकाया सब्सिडी को मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
Income support scheme:- दो हेक्टेयर से कम भूमि वाले किसानों के लिए एक संरचित आय सहायता योजना की घोषणा की गई थी। प्रधान मंत्री किसान सम्मान निधि से, ग्रामीण और गरीब किसानों को प्रति वर्ष रु .6,000 दिए जाने लगे। यह सीधे केंद्र से किसानों के बैंक खातों में रु .2,000 की किस्तों में हस्तांतरित किया गया। इससे सरकार को 75,000 करोड़ रुपये का खर्च आएगा और इससे 12 करोड़ किसानों को फायदा हुआ है। वित्त वर्ष 19 में बजट 20,000 करोड़ आवंटित किया गया है। इससे किसानों को खाद, बीज इत्यादि प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।
Dairy development: राष्ट्रीय गोकुल मिशन को 750 करोड़ रुपये आवंटित किए गए।
Subvention of interest rates: पशुपालन और अन्य कृषि-संबद्ध गतिविधियों में शामिल किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड योजना के माध्यम से 2% की ब्याज सब्सिडी की घोषणा की गई। यह आय के वैकल्पिक स्रोतों को विकसित करने में उनका समर्थन करता है। कृषि वित्त संस्थानों को भी लगभग 2800 करोड़ रुपये के आवंटन में वृद्धि मिली है।
पीएम किसान सम्मान निधि स्कीम-
किसानों की मदद के लिए केंद्र सरकार ने पीएम किसान स्कीम की शुरुआत की है। आपको बता दें कि पीएम किसान सम्मान निधि स्कीम की सातवीं किस्त जारी हो चुकी है। पीएम मोदी ने इस स्कीम के तहत 18,000 करोड़ रुपये की एकमुश्त रकम जारी की है। केंद्र सरकार के मुताबिक अब तक इस स्कीम के तहत 10.60 करोड़ किसानों को 95,000 करोड़ रुपये की रकम जारी की जा चुकी है।
Published on:
16 Jan 2021 03:13 am
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