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Iran से तेल खरीदना 4 भारतीय कंपनियों को पड़ा भारी, अमेरिका ने लगाया प्रतिबंध, जानिए क्या पड़ेगा असर

India Iran Oil Trade: ईरान से पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पाद खरीदने के आरोप में अमेरिका ने चार भारतीय कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया है। इनमें Portease Partners, Sadashiva Overseas, PP Softtech और Prakrutees Infra शामिल हैं।
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भारत

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Pawan Jayaswal

Aug 25, 2026

US Sanctions on Indian Companies

अमेरिका ने 4 भारतीय कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए हैं।

US Sanctions on Indian Companies: ईरान से पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पाद खरीदना चार भारतीय कंपनियों के लिए भारी पड़ गया है। अमेरिका ने इन कंपनियों और उनसे जुड़े कुछ भारतीय नागरिकों पर प्रतिबंध लगा दिया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि इन कंपनियों ने ईरान से तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों से जुड़े बड़े कारोबार में भूमिका निभाई। अमेरिका ने जिन कंपनियों पर एक्शन लिया है, उनमें Portease Partners LLP, Sadashiva Overseas Limited, PP Softtech Private Limited और Prakrutees Infra Impex Private Limited शामिल हैं। इनके अलावा कुछ कंपनियों के पार्टनर्स और डायरेक्टर्स भी अमेरिकी कार्रवाई के दायरे में आए हैं।

किन लोगों पर हुई कार्रवाई?

अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, Portease Partners LLP और उसके पार्टनर इंद्रिसमिया अशरफिया शेख तथा हरीश रामचंद्र रंगी ने ईरान से पेट्रोकेमिकल उत्पादों की कई खेपों के आयात में मदद की। इसके अलावा सदाशिव ओवरसीज लिमिटेड, पीपी सॉफ्टटेक प्राइवेट लिमिटड और उसके डायरेक्टर प्रशांत गर्ग तथा Prakrutees Infra Impex Private Limited पर भी कार्रवाई की गई है। अमेरिकी सरकार के बयान के अनुसार शेख, रंगी और गर्ग भारतीय नागरिक हैं।

करोड़ों डॉलर के ईरानी तेल उत्पादों का कारोबार

अमेरिका के मुताबिक, सदाशिव ओवरसीज ने अलग-अलग कंपनियों से करीब 69 मिलियन डॉलर यानी लगभग 570 करोड़ रुपये के ईरानी मूल के पेट्रोलियम उत्पाद खरीदे थे। वहीं, पीपी सॉफ्टटेक और Prakrutees Infra ने करीब 25-25 मिलियन डॉलर यानी लगभग 205-205 करोड़ रुपये के पेट्रोलियम उत्पादों का आयात किया था। अमेरिका ने इन कंपनियों को उस लिस्ट में शामिल किया है, जिन पर ईरान से पेट्रोलियम या पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद, बिक्री, परिवहन या मार्केटिंग से जुड़े महत्वपूर्ण लेनदेन में जानबूझकर शामिल होने का आरोप है।

अमेरिका ने क्यों कड़ा किया रुख?

यह कार्रवाई ईरान की कमाई के स्रोतों पर दबाव बढ़ाने की अमेरिकी रणनीति का हिस्सा है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोमवार को 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' की घोषणा की थी। इस अभियान का मकसद ईरान की आय के प्रमुख रास्तों को कमजोर करना है। अमेरिका उन कंपनियों और संस्थाओं पर भी कार्रवाई की चेतावनी दे रहा है, जो ईरान के साथ कारोबार जारी रखती हैं। वॉशिंगटन अब सिर्फ ईरान पर ही दबाव नहीं बढ़ा रहा, बल्कि उसके साथ कारोबार करने वाली विदेशी कंपनियों के लिए भी जोखिम बढ़ा रहा है।

करीब 60 कंपनियों, लोगों और जहाजों पर कार्रवाई

स्कॉट बेसेंट की घोषणा के बाद अमेरिका ने ईरान से जुड़े करीब 60 संस्थानों, लोगों और जहाजों पर प्रतिबंध लगाए हैं। इनमें ईरान की सैन्य गतिविधियों, खरीद नेटवर्क और तेल तथा पेट्रोकेमिकल कारोबार से जुड़े लोगों और संस्थाओं को निशाना बनाया गया। अमेरिकी सरकार ने यह कार्रवाई एग्जिक्यूटिव ऑर्डर्स 13846 और 13949 के तहत की है। ये आदेश ईरान की पेट्रोलियम से होने वाली कमाई और कथित पारंपरिक हथियारों के प्रसार से जुड़े मामलों पर कार्रवाई की अनुमति देते हैं। अमेरिका ने ईरान के कुछ वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को भी निशाना बनाया है। इसके लिए अमेरिकी वित्त विभाग के साथ रिवॉर्ड्स फॉर जस्टिस प्रोग्राम का इस्तेमाल किया गया।

भारत की कंपनियों पर क्या असर पड़ सकता है?

अमेरिकी प्रतिबंध लगने के बाद इन कंपनियों के लिए अमेरिका से जुड़े कारोबारी रास्तों पर मुश्किलें बढ़ सकती हैं। बैंकिंग सेवाओं, डॉलर में भुगतान और अंतरराष्ट्रीय कारोबार से जुड़ी सुविधाओं पर असर पड़ने का जोखिम रहता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन कंपनियों के साथ कारोबार करने वाले दूसरे कारोबारी और वित्तीय संस्थान अब कितनी सावधानी बरतेंगे। अमेरिकी प्रतिबंधों का दायरा बढ़ने से ईरान के साथ कारोबार करने वाली अन्य कंपनियों पर भी दबाव बन सकता है।

'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' का मतलब क्या है?

यह अमेरिका की ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की नई मुहिम है। इसके तहत ईरान की तेल और पेट्रोकेमिकल आय को निशाना बनाया जा रहा है। साथ ही उन कंपनियों और संस्थाओं के लिए भी खतरा बढ़ाया गया है, जो ईरान के साथ कारोबार जारी रखती हैं। यानी आगे आने वाले दिनों में ईरान के साथ तेल कारोबार करने वाली विदेशी कंपनियों को अमेरिकी प्रतिबंधों का जोखिम ध्यान में रखना होगा।