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फॉसिल फ्यूल से चलने वाले टूव्हीलर और थ्रीव्हीलर वाहनों पर रोक लगाने की तैयारी में सरकार

( Electric Vehicles ) इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए योजना बना रही सरकार भारत में बंद कर सकती है दुपहिया और तीन पहिया वाहन हाल ही में सरकार के सामने एक कमिटी ने रखा है ये प्रस्ताव
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Vineet Singh

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Updated: 16 Jul 2019, 10:13 AM IST

Electric Vehicles

जीवाश्म ईंधन से चलने वाले टूव्हीलर और थ्रीव्हीलर वाहनों पर रोक लगाने की तैयारी में सरकार

नई दिल्ली: देश में बढ़ते हुए प्रदूषण को देखते हुए अब भारत सरकार जीवाश्म ईंधन से चलने वाले दो पहिया और तीनपहिया वाहनों पर पूरी तरह से प्रतिबन्ध लगाने की योजना बना रही है। इस योजना का मकसद भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों ( Electric vehicles ) को बढ़ावा देना है।

ऑटोमोबाइल कंपनियों के जबरदस्त दबाव के बावजूद सरकार इस योजना पर विचार कर रही है। दरअसल ऑटोमोबाइल कंपनियां सरकार का विरोध कर रही हैं और उनके मुताबिक़ सरकार देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को उतारने में जल्दबाजी कर रही है क्योंकि भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के इंफ्रास्ट्रक्चर को तैयार होने में अभी समय लगेगा।

यह योजना यह ऑटो कंपनियों के मजबूत दबाव का सामना करने के बावजूद है, जो कहते हैं कि इस कदम से जल्दबाजी होती है और देश में चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर स्विच का समर्थन करने के लिए समय पर तैयार नहीं होगा।

हाल ही में एक कमिटी ने सरकार के सामने इस योजना का प्रस्ताव रखा है जिसके मुताबिक़ 150cc कपैसिटी के दो पहिया एयर तीन पहिया वाहनों को मार्च 2023 और March 2025 तक बैन कर दिया जाना चाहिए।

दोपहिया वाहन बनाने वाली कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'बाजार के इतने बड़े सेगमेंट में स्विच करना और भारत स्टेज VI में संक्रमण की अवधि के बीच ऐसा करना कोई मजाक नहीं है।'

“हमारे वित्त पर दबाव उस चीज़ से बड़ा होगा जो हम संभाल सकते हैं। यह सब करने के लिए, ग्राहक खुद इस तरह से इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के लिए तैयार होने के लिए तैयार नहीं होगा, ”कार्यकारी ने कहा।

पिछले हफ्ते TVS मोटर कंपनी की एक इथेनॉल से चलने वाली बाइक (Apache) के लॉन्च इवेंट में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इलेक्ट्रिक वाहनों के पक्ष में जोरदार वकालत की। गडकरी का मंत्रालय संचालन समिति का हिस्सा है।

यह पूछे जाने पर कि क्या निर्माताओं के कड़े विरोध को देखते हुए सरकार ने कुछ सूचीबद्ध खंडों के लिए बिजली को अनिवार्य रूप से बदलने के प्रस्ताव पर पुनर्विचार किया, गडकरी ने बिजली के स्विच का लाभ दोहराया।

उन्होंने कहा, 'पेट्रोल के दाम 80 रुपये और डीजल 70 रुपये प्रति लीटर है। एक व्यक्ति के रूप में, आप ईंधन पर प्रति माह 6,000 रुपये खर्च करते हैं और अगर यह खर्च प्रति माह 1,500 रुपये तक गिरता है, तो मुझे इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए विपणन करने के लिए आपके पास आने की आवश्यकता नहीं है। यह एक प्राकृतिक कोर्स बन जाएगा।