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इस तरह कंपनियां तय करती हैं कार के मॉडल का नाम

पिछले दिनों काफी तेज भागने वाले जानवरों और सांपो के नाम से बनी कार मॉडल जैसे मस्तांग, बीटल, कोबरा और जगुआर काफी प्रसिद्ध थी लेकिन अब ये नाम क्रेज खोने

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Kamal Singh Rajpoot

Dec 04, 2017

car models name

क्या आप जानते हैं कि एक कार का नाम कैसे तय किया जाता है। जैसे कि क्या आपने ट्रम्पची के बारे में सुना है? नहीं, लेकिन इसका अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नाम से कोई लेना देना नहीं है। इस लोकप्रिय चीनी कार को 2010 में लॉन्च किया गया था, ट्रंप के राष्ट्रपति पद संभालने से बहुत पहले। लेकिन अब जीएसी ग्रुप अब अमरीका में इसे उतारने की योजना बना रही है। लेकिन नाम समस्या है। आईए जानते हैं कारों के नामकरण की कला और विज्ञान केे बारे में...।

वैश्विक न की स्थानीय
जब टॉटा मोटर्स ने इंडिका और इंडिगो जैसे कार के मॉडल बनाए तो यह स्थानीयता पर आधारित था। लेकिन जब कंपनी ने इन्हें दुनिया के बाजारों में उतारना चाहा तो इसका नाम बोल्ट, जेस्ट, टियागो और हेक्सा रखना पड़ा।

जानवरों के नामों का क्रेज कम हुआ
पिछले दिनों काफी तेज भागने वाले जानवरों और सांपो के नाम से बनी कार मॉडल जैसे मस्तांग, बीटल, कोबरा और जगुआर काफी प्रसिद्ध थी लेकिन अब ये नाम क्रेज खोने लगे हैं।

अल्फान्यूमरिक नामों का उभार
इस समय कारों के नाम अल्फान्यूमरिक में रखने का चलन है। जैसे कि लग्जरी कार ऑडी, बीएमडब्ल्यू, मसर्डीज। वहीं जो सोचने पर मजबूर करें जैसे कि एमएंडएम टीयूवी300, एक्सयूवी500।

छोटे और सामान्य नाम
कई शब्दों से बने कार मॉडलों के नाम अब नहीं रखे जा रहे हैं जैसे कि मरकरी ग्रैंड मारक्यूस कॉलोनी पार्क। टंग ट्विस्टर, निसान कश्कई और वीडब्ल्यू टूआरेग नाम हैं लेकिन अब छोटे नाम वाले मॉडल चलन में है जैसे कि फोर्ड केए, डैटसन गो।

इस तरह से तय होते हैं नाम
जब डिजाइनर कार की डिजाइन तय करता है उस समय कई नामों को सामने रखता है।
प्रत्येक कार बनने की प्रक्रिया के दौरान मॉडल का एक कॉन्सेप्ट नाम रखा जाता है। लेकिन टाटा हेक्सा का नाम लॉन्च के दौरान भी वहीं रहा।
कई कंपनियां धार्मिक नामों को भी महत्व देती हैं जैसे कि वीडब्ल्यू का हवाओं के नाम पर रखा गया।
डिजाइनर के बाद मार्केटिंग, विज्ञापनदाता भी मॉडल के नाम का सुझाव देते हैं।
नाम रखते समय ध्यान रखा जाता है कि वह सामान्य हो, जो कि आसानी से बोला जा सके।
किसी मॉडल का नाम तय करने से पहले उसके नकारात्मक प्रभावों का १०० भाषाओं में आकलन किया जाता है।
कॉपीराइट का मामला काफी लंबी प्रक्रिया होती है। यहां तक की मिलता-जुलता नाम भी कंपनी को दिक्कत में ला सकता है।
इन सारी प्रक्रियाओं के बाद कंपनी के सीईओ और बोर्ड सदस्य नाम फाइनल करते हैं।