
Renault Zoe Electric Powered by Animal Poop biomethanol
पारंपरिक फ्यूल यानी कि पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर पूरी दुनिया भर में जंग छिड़ी है। हर देश के वैज्ञानिक इन पारंपरिक फ़्यूल पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। जब ज्यादातर लोग एक वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत द्वारा संचालित कारों के बारे में सोचते हैं, तो आमतौर पर एक इलेक्ट्रिक या एक हाइब्रिड कार दिमाग में आता है।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि गाय या किसी मवेशी के गोबर से तैयार किए जाने वाले बायोमेथेनॉल (Biomethanol) भी एक बेहतर विकल्प है। हाल ही में बायोमेथेनॉल से संचालिक एक इलेक्ट्रिक कार ने फुल टैंक में बिना रूके 2,000 किलोमीटर तक का सफर कर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है।
बायोमेथेनॉल की प्रभावशीलता और क्षमताओं को दिखाने के लिए, फ्रांसीसी इंजीनियरों की एक टीम ने एक मॉडिफाइड Renault Zoe इलेक्ट्रिक कार से ये रिकॉर्ड दर्ज किया है। डेली बीस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार इस टीम में शामिल पांच चालकों ने तीन दिनों तक बारी-बारी से एक ड्राइविंग ट्रैक के आसपास इस प्रोटोटाइप वाहन को चलाया। इस कार के टैंक में बायोमेथेनॉल से बने गैस को भरा गया था और इस दौरान इस कार ने कुल 2,000 किलोमीटर (लगभग 1,243 मील) की यात्रा की।
गाय या मवेशी के गोबर से तैयार बायोमेथेनॉल से चलने वाली इस कार ने किसी भी हाइड्रोजन कार द्वारा तय की गई सबसे लंबी दूरी के रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया है। अब तक ये रिकॉर्ड टोयोटा मिराई (Toyota Mirai) के नाम दर्ज था, जिसने फुल टैंक में 845 मील या 1359 किलोमीटर तक की दूरी तय की थी। हालांकि मिराई वर्तमान में व्यावसायिक रूप से उपलब्ध एकमात्र हाइड्रोजन कार है। हाल ही में इस कार को टोयोटा के द्वारा भारत में भी प्रदर्शित किया गया था, बीते दिनों केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी टोयोटा मिराई से संसद पहुंचे थें।
क्या है बायोमेथेनॉल:
बहरहाल, एआरएम (ARM) इंजीनियरिंग नाम के एक फ्रांसीसी ट्रांसपोर्टेशन रिसर्च एंड डेवलपमेंट फर्म, ने बायोमेथेनॉल विकसित किया, जिसे "जीएच -3 (GH-3) कहा जाता है। इस फर्म ने इस ईंधन को "बायोमास मिथेनेशन" नामक एक प्रक्रिया के माध्यम से बनाया है। यह बायोमास मिथेनेशन प्रक्रिया गैर-खाद्य बायोमास जैसे पौधों के अवशेषों और खाद को लेता है और कार की बैटरी के लिए बिजली बनाने के लिए इसे ईंधन में बदल देता है।
दरअसल, GH-3 अमेरिका में उपलब्ध जैव ईंधन के समान ही है, जैसे E85, जो 85 प्रतिशत मकई-आधारित इथेनॉल और 15 प्रतिशत गैसोलीन से बना है। हालांकि, E85 के विपरीत, GH-3 में कोई जीवाश्म ईंधन नहीं है, इसे हाइड्रोजन में परिवर्तित किया जा सकता है जो कार को शक्ति प्रदान करता है। बायोमेथेनॉल और इससे प्राप्त हाइड्रोजन ईंधन का सबसे बड़ा लाभ यह है कि, यह एक स्वच्छ ऊर्जा स्रोत है, जो शून्य कार्बन उत्सर्जन करता है। इसके अलावा, हाइड्रोजन ब्रह्मांड में सबसे प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होने वाला तत्व है।
Published on:
09 Jul 2022 01:52 pm
बड़ी खबरें
View Allकार
ऑटोमोबाइल
ट्रेंडिंग
