
पिता हरिकेश का रुंधा हुआ गला और डबडबाई हुई आंखें। खुद को संभालते हुए बताते हैं कि बेटे का सपना था कि नया घर बने। उसके जाने के बाद जब नया घर बनकर तैयार हुआ तब कुछ दिन बाद ही उनकी मां मालती देवी का भी निधन हो गया। मां-बेटे दोनों का नए घर में रहने का सपना अधूरा ही रह गया।
जिला चंदौली, गांव बहादुरपुर। इसी गांव के रहने वाले थे पुलवामा हमले में शहीद हुए हेड कांस्टेबल अवधेश यादव। अवधेश दो भाइयों में बड़े थे। पिता हरिकेश यादव ने बताया कि अवधेश ने साल 2006 में CRPF जॉइन की थी।
शहीद अवधेश यादव के पिता हरिकेश यादव ने बताया कि उसकी मां मालती देवी कैंसर से पीड़ित थीं। बेटे ने इलाज करवाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी थी। बेटे का यही सेवाभाव देखकर मां को कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से लड़ने में हिम्मत मिलती थी।
कश्मीर के पुलवामा जिले में हुए हमले में CRPF के कुल 40 जवान शहीद हुए थे। जिसमें में 12 जवान उत्तर प्रदेश के रहने वाले थे। आज के कहानी में पढ़िए देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले हेड कांस्टेबल अवधेश यादव की कहानी। हमने उनके पिता हरिकेश यादव से उनके घर जाकर बातचीत की। उन्होंने एक-एक करके बेटे के किस्सों को शेयर किया है। आइए उन्हीं किस्से-कहानियों में उतरते हैं।
सिर्फ 3 दिन पहले छुट्टी काटकर ड्यूटी पर जा रहे थे अवधेश
पिता हरिकेश यादव ने बताया कि चार बेटे-बेटियों में अवधेश सबसे बड़े थे। साल 2006 में वह CRPF की 145वीं बटालियन में भर्ती हुए थे। फैमिली में पिता बहु और छोटा बेटा है। मां मल्टी देवी का जो कैंसर से पीड़ित थीं, दो साल पहले उनका निधन हो गया। दो बहनों की शादी हो चुकी है।
अवधेश की शादी सैयदराजा के पुरवा गांव निवासी जनार्दन यादव की बेटी शिल्पी के साथ हुई थी। उन्हें 7 साल का एक बेटा निखिल है।
पॉलिटेक्निक किए थे, पढ़ने में तेज थे, बाद में सिग्नल कोर में बने रेडियो ऑपरेटर
पिता हरिकेश ने बताया कि अवधेश पढ़ने में तेज-तर्रार थे। कानपुर से उन्होंने पॉलिटेक्निक किया था। जब वह भर्ती हुए तब वह जनरल ड्यूटी के रूप में भर्ती हुए थे। लेकिन, बाद में प्रमोशन हुआ तो CRPF के सिग्नल डिपार्टमेंट में आ गए और रेडियो ऑपरेटर बने।
जल्द ही रांची होने वाला था ट्रांसफर, घर बनवाने को लेकर थे उत्सुक
14 फरवरी यानी हमले वाले दिन से 3 दिन पहले ही अवधेश छुट्टी काटकर वापस जा रहे थे। उनको कश्मीर में 4 साल पूरा हो गया था। जल्द ही उनका ट्रांसफर रांची होने वाला था। जाते टाइम पिता हरिकेश से उन्होंने कहा था कि अगली बार आएंगे तो पुराने घर को तोड़कर नया घर बनवाया जाएगा।
मां-बेटे का नए घर में रहने का सपना अधूरा ही रहा, इतना कहते ही फफक कर रो पड़े पिता
पिता हरिकेश का रुंधा हुआ गला और डबडबाई हुई आंखें। खुद को संभालते हुए बताते हैं कि बेटे का सपना था कि नया घर बने। उसके जाने के बाद जब नया घर बनकर तैयार हुआ तब कुछ दिन बाद ही उनकी मां मालती देवी का भी निधन हो गया। मां-बेटे दोनों का नए घर में रहने का सपना अधूरा ही रह गया। इतना कहते ही पिता हरिकेश फफक कर रो पड़े।
पत्नी शिल्पी हैं बड़े बाबू,बेटे निखिल को लेकर मायके में रहती हैं
हमने शहीद अवधेश यादव की पत्नी शिल्पी यादव से फोन कर बात करने की कोशिश की लेकिन बात नहीं हो सकी। शिल्पी यादव के भाई ने बताया की वह मुगलसराय में मायके यानी पंडित दीन दयाल उपाध्याय नगर में रहती हैं। राज्य सरकार की तरफ से उन्हें कलेक्ट्रेट में बड़े बाबू की नौकरी मिली है।
बचपन से मां गंगा की गोद में खेलने वाला लाल, मां गंगा में प्रवाहित हुआ
बहादुरपुर यानी शहीद अवधेश का गांव गंगा नदी के किनारे बसा है। बचपन से अवधेश अपने दोस्तों के साथ गंगा नदी में नहाने जाते थे। निधन के बाद उनका दाह संस्कार भी उसी गंगा नदी के तट पर किया गया था।
एयरपोर्ट से घर तक रास्ते भर लोग पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगा रहे थे
पिता ने बताया कि शहीद बेटे का पार्थिव शरीर जब बाबतपुर एयरपोर्ट से सीआरपीएफ की गाड़ी से उनके पैतृक गांव बहादुरपुर आ रहा था, उस दौरान रास्ते भर लोग तिरंगा लेकर 'भारत माता की जय' और 'पाकिस्तान मुर्दाबाद' के साथ 'जब तक सूरज चांद रहेगा-अवधेश तुम्हारा नाम रहेगा' के नारे लगाते चल रहे थे।
देश सेवा पर कुर्बान होने वाले बेटे के लिए एक तरफ बाप होने के नाते गहरा दुःख था तो दूसरी तरफ पूरा क्षेत्र उसको अपना बेटा मान रहा था। देशभक्ति का जज्बा, देश के लिए प्रेम और शहीद बेटे के सम्मान को देखकर गर्व से छाती चौड़ी हो रही थी।
कैसे हुआ था पुलवामा हमला? कितने जवान हुए थे शहीद?
केन्द्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स यानी CRPF की 78 बसों का काफिला कश्मीर के पुलवामा जिले से गुजर रहा था। इन बसों में कुल 2500 जवान सवार थे। दोपहर के करीब 3:30 बज रहे थे। भारत मां के लाल बसों में आराम से बैठे थे।
काफिला अपने तय रूट पर आगे बढ़ रहा था। कुछ जवान बस में गुनगुना रहे थे, कुछ चुटकुले सुना रहे थे, कुछ ठहाका लगा रहे थे और कुछ जम्हाई ले रहे थे।
सड़क की दूसरी तरफ से आ रही एक SUV ने काफिले के साथ चल रही एक बस में टक्कर मार दी। SUV जैसे ही जवानों के काफिले से टकराई, वैसे ही उसमें जबरदस्त विस्फोट हो गया।
धमाका इतना भयंकर था कि बस के परखच्चे उड़ गए। इसके बाद घात लगाए आतंकियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस हमले में CRPF के 40 जवान शहीद हो गए। शहीद हुए इन जांबाजों ने देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।
Updated on:
14 Feb 2023 08:10 pm
Published on:
14 Feb 2023 07:36 pm
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