
आरपीएफ का क्लर्क लगा रहा था सहकर्मियों को चूना, जानिए कैसे
चंदौली। मुगलसराय कोतवाली पुलिस ने बड़ी सफलता प्राप्त की है मुगलसराय पुलिस ने सर्विलांस की सहायता से आरपीएफ डिपार्टमेंट में करोड़ों का गबन करने वाले डिपार्टमेंट के वेतन विभाग में तैनात क्लर्क को गिरफ्तार किया है। पकड़ा गया आरक्षी आरपीएफ कर्मियों के अकाउंट नंबर की जगह अपनी पत्नी और अपना नंबर डालकर उनके गाढ़ी कमाई पर हाथ साफ करता था। पुलिस की अभी तक की जांच में उसके द्वारा 3 करोड़ से अधिक की हेरा-फेरी के कागजात सामने आए हैं। अभियुक्त युवराज सिंह निवासी ग्राम बेरी खेड़ा थाना साढ़ जिला कानपुर को हरिशंकरपुर मोड़, आईपी मुगल के पास से पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इतना बड़ा मामला तब खुला जब आरपीएफ सिपाही के पीएफ का पैसा आरोपी की पत्नी के अकाउंट में चला गया। फिलहाल एसपी डॉ अनिल कुमार ने पूछताछ के बाद उसे सम्बंधित धराओं में जेल भेज दिया है।
पीएफ के फंड ने खोल दिया राज
इस संबंध में पुलिस लाइन सभागार, चंदौली में बता करते हुए एसपी डॉ अनिल कुमार ने बताया कि सहायक सुरक्षा आयुक्त/आरपीएफ पीडीडीयू नगर जंक्शन ने लिखित सूचना मुगलसराय थाने पर दी थी कि आरक्षी मोहम्मद मुजीब के द्वारा अपने पीएफ खाते से 17 अक्टूबर को 92000 रुपए निकासी का आवेदन क्लर्क को दिया था. जो 17 को ही यहां से अग्रसारित होकर हाजीपुर पहुंच गया और धनराशि भी आवंटित हो गई, लेकिन मुजूब के खाते में पैसा नहीं आया तो उसने जानकारी की तो पता चला कि धनराशि तो उसी दिन भेज दी गई थी।
जांच में आया सच सामने
पीड़ित ने बताया कि उसने जब जांच की तो पता चला कि उसका पैसा अभियुक्त युवराज सिंह द्वारा मेरे खाते के स्थान पर अपनी पत्नी नीतू का खाता दर्ज किया था, जिससे उक्त धनराशि उसकी पत्नी के खाते में चली गई और अभियुक्त द्वारा अपनी पत्नी के खाते से मोहम्मद मुजीब के खाते में ट्रान्सफर नहीं कर पाया ।बैंक से पे-स्लीप निकलवाने पर उक्त सभी गबन की जानकारी हुई, जिसके आधार पर उक्त अभियोग पंजीकृत हुआ। अब तक की विवेचना से 3,61,91,217 रुपया अभियुक्त द्वारा अधिकारी/कर्मचारी गण का अपने व अपने पत्नी के खाते में पैसा ट्रान्सफर करना पाया जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक चन्दौली डा अनिल कुमार के निर्देशन पर मुकदमा पंजीकृत करके जब मामले की गहनता से जांच शुरू की गई।
पूछताछ में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
अभियुक्त युवराज सिंह ने बताया कि 2006 में आरपीएफ में आरक्षी के पद पर उसकी नियुक्ति हुई थी। बाद में मेडिकल अनफीट होने के कारण 2017 में क्लर्क के पद पर नियुक्त हो गया। मेरे द्वारा क्लर्क के रुप में आरपीएफ के अधिकारी कर्म.गण का वेतन बनाया जाता था। मेरे सेक्शन में मेरे ऊपर एल 2, मुख्य कार्यालय अधीक्षक एवम् एल 3 , सहायक सुरक्षा आयुक्त थे, जिनके द्वारा मेरे द्वारा बनाये गये बिलो का जांच करने के पश्चात आंकिक शाखा में बिल जाता था। वहां पर भी एल 1 अधिकारी ,सहायक आंकिक एल 2 अधिकारी सेक्शन आफिसर द्वारा चेक करने के पश्चात एल 3 अधिकारी ,सहायक मण्डल वित्त प्रबन्धक द्वारा बिल को पास कर पेमेन्ट किया जाता था। उसके बाद सम्बन्धित के खाते में पैसा चला जाता था। साहब वर्ष 2016 में AIMS (ACCOUNTING INFORMATION MANAGEMENT SYSTEM ) साफ्टवेयर आया जिसमें मै किसी कर्मचारी का पैसा ज्यादा भरकर लगा देता था तो उसे कोई पकड़ नहीं पाता था और इसी सिस्टम के माध्यम से सम्बन्धित कर्मचारी को खाते में अंकित खाता नम्बर को बदलकर अपनी पत्नी अथवा अपना खाता नम्बर डाल देता था।
Published on:
22 Nov 2023 10:36 pm
बड़ी खबरें
View Allचंदौली
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
