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विज और कालिया के बीच विवाद पर सदन में भारी हंगामा

मुख्यमंत्री ने दी क्लीन चिट तो कांग्रेस पड़ी अलग-थलग, विज के साथ खड़ा मंत्रीमंडल और विपक्षी इनेलो, भाजपा ने जैसिका लाल व नैना साहनी का मुद्दा उठाया

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Vikas Gupta

Nov 30, 2015

Dispute between SP Sangeeta Kalia and Anil Vij

Dispute between SP Sangeeta Kalia and Anil Vij

चंडीगढ़। हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज तथा फतेहाबाद की निवर्तमान एस.पी. संगीता कालिया के बीच छिड़े विवाद को लेकर विधानसभा में जोरदार हंगामा हुआ। करीब आधे घंटे की बहस के बीच इस मुद्दे को उठाने वाले कांग्रेस अलग-थलग पड़ गई जबकि भाजपा के अलावा विपक्षी दल इनेलो तथा निर्दलीय विधायक ने खुलकर अनिल विज का समर्थन किया। इस विवाद पर विराम लगाते हुए मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने खुद सदन में खड़े होकर सरकार का पक्ष रखा और स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को परोक्ष रूप से क्लीन चिट दे डाली।

विधानसभा में प्रश्नकाल के बाद जैसे ही शून्यकाल की कार्रवाई शुरू हुई तो कांग्रेस विधायक गीता भुक्कल ने स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज द्वारा फतेहाबाद की पूर्व एसपी के साथ किए अभद्र व्यवहार का मामा उठा दिया। गीता भुक्कल ने इसे जातिगत रंगत देते हुए कहा कि विज ने एक महिला व दलित अधिकारी के साथ अभद्र व्यवहार किया है, इसलिए वह सदन में माफी मांगे। इस मुद्दे पर भाजपा व कांग्रेस में बहस शुरू हो गई। बहस इतनी बढ़ी कि भाजपा विधानसभा महीपाल ढांडा तथा असीम गोयल ने कांग्रेस पर जैसिका लाल और नैना साहनी का नाम लेकर कटाक्ष करना शुरू कर दिया।

कांग्रेस की तरफ से यह मुद्दा उठाने वाले गीता भुक्कल को अपनी ही पार्टी का समर्थन नहीं मिला। गीता भुक्कल जब यह मुद्दा उठा रही थी तो विधायक दल की नेता किरण चौधरी ने बीच में ही टोकते हुए धान घोटाले का मुद्दा उठा दिया। जिससे सदन का माहौल बदल गया। इसके बाद गीता भुक्कल ने फिर से इसे एक दलित का अपमान करार दिया तो भाजपा की तरफ से वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने मोर्चा संभाला और उन्होंने कांग्रेस के कार्यकाल में हुई दलित उत्पीडऩ की घटनाओं पर कांग्रेस को घेरा। इसके बाद भाजपा विधायक संतोष सारवान ने पूर्व हुड्डा सरकार को गोहाना, मिर्चपुर की घटनाओं पर घेरा। काफी हंगामे के बाद अनिल विज जब अपना पक्ष बताने के लिए खड़े हुए तो कांग्रेसियों ने शोर मचाना शुरू कर दिया।

घटनाक्रम पर बोलते हुए उन्होंने कहा एनजीओ द्वारा गैर कानूनी तौर पर शराब बेचने की शिकायत पहले से सूचीबद्घ थी, एनजीओ के कुछ कार्यकर्ता अपनी बात रख रहे थे। परन्तु इसी बीच एसपी संगीता कालिया ने एनजीओ के कार्यकताओं को धमकाना शुरू कर दिया। कष्टï निवारण समिति के अध्यक्ष होने के कारण इस प्रकार का व्यवहार सभी के लिए हमेशा निंदनीय रहेगा, जिसको कोई भी ठीक नही मानेगा। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि बैठक की अध्यक्षता करते हुए वे एनजीओ से इस मामले को गहराई से समझना चाहते थे इसलिए उन्होंने एसपी को बाहर जाने को कहा था ताकि वह मामले को अच्छी प्रकार से समझ सके। परन्तु एसपी द्वारा उनकी बात अनसुनी करने के कारण वे बैठक को स्थगित करके आ गये ताकि भविष्य में इस मामले को गहराई से समझ कर उसका हल निकाला जा सके।

इस पर भी जब विपक्ष शांत नहीं हुआ तो मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर खुद सदन में खड़े हुए और कहा कि आई.पी.एस. या आई.ए.एस. अधिकारी की कोई जाति नहीं होती है। अधिकारी को जातिगत अथवा जैंडर के हिसाब से आंकना ठीक नहीं। एसपी की कोई जाति नही होती वह केवल समाज में निर्भय प्रशासन देने और जनता की दिक्कतें दूर करने के लिए तैनात होते हैं। सरकार नशे पर कभी कोई समझौता नही करेगी और ऐसे लोगों के खिलाफ सख्ती से बरतेगी। मुख्यमंत्री ने संगीता कालिया के तबादले को लेकर चल रहे विवाद पर विराम लगाते हुए कहा कि तबादला किसी भी नौकरी का हिस्सा है। इसका मुद्दा बनाना ठीक नहीं। मुख्यमंत्री की इस बात का समर्थन करते हुए निर्दलीय विधायक जयप्रकाश ने भी खुलकर अनिल विज का समर्थन किया और कहा कि अधिकारियों के खिलाफ इससे भी अधिक सख्ती की जरूरत है। यह अधिकारी जनता को दूर विधायकों के भी फोन नहीं उठाते हैं।

अभय चौटाला व कुलदीप शर्मा में भारी बहस
विज-कालिया विवाद में जब कांग्रेस अनिल विज को घेर रही थी तो विपक्ष के नेता अभय चौटाला ने परोक्ष रूप से विज का समर्थन करते हुए कांग्रेस से सवाल किया कि कांग्रेस सरकार में मौजूदा परिवहन मंत्री कृष्ण पंवार इनेलो के विधायक होते थे और स्पीकर की कुर्सी पर बैठने वाले कांग्रेस के कुलदीप शर्मा ने उन्हें सदन के भीतर जातिसूचक शब्द कहे थे। जिसकी शिकायत चंडीगढ़ पुलिस के पास लंबित है। कृष्ण पंवार के मामले पर अभय चौटाला और कुलदीप शर्मा में तीखी बहस हुई। शर्मा ने अभय चौटाला पर सदन में झूठ बोलने का आरोप लगाया तो विवाद और बढ़ गया। दोनों में कथित तौर पर संकेतिक गाली-गलौच भी हुआ। जिसके चलते विधानसभा पुलिस के जवान बैल के भीतर आ गए और दोनों नेताओं को अलग करके मामले को शांत किया। इसके बाद स्पीकर ने इस प्रकरण को सदन की कार्यवाही से बाहर कर दिया।

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