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चंडीगढ़। हरियाणा की मौजूदा सरकार ने अपने कार्यकाल के तीसरे साल में प्रवेश कर लिया है। तीसरे साल को अपने कार्यकाल में बीच का साल मानते हुए प्रदेश सरकार इस वर्ष तहां कई बड़ी योजनाओं को धरातल पर लागू करते हुए लोगों को राहत देने की तैयारी में है वहीं प्रदेश की जनता को कई तरह के करों का भी सामना करना पड़ सकता है।
हरियाणा सरकार ने हालही में अपने कार्यकाल के दो वर्ष पूरे किए हैं। किसी भी सरकार के लिए तीसरे वर्ष को सबसे अहम माना जाता है। क्योंकि इस वर्ष के दौरान जनता में सरकार की छवि स्थापित होगी। ऐसे में हरियाणा की वर्तमान मनोहर सरकार फूंक-फूंक कर कदम रखने की तैयारी कर रही है।
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने आगामी एक वर्ष के रोड़ मैप को लेकर आज कई तरह के संकेत दिए। अपने कार्यकाल के तीसरे वर्ष में हरियाणा सरकार 1700 करोड़ रुपए की लागत से लागू की जाने वाली योजनाओं को स्वीकृति प्रदान कर चुकी है। मुख्यमंत्री ने इस बात के साफ संकेत दिए कि इस वर्ष में जनहित से जुड़ी जिन योजनाओं को लागू किया जाएगा उनका बजट 1700 करोड़ से भी आगे जा सकता है।
मुख्यमंत्री खट्टर ने आबकारी विभाग में कर वूसली में भारी वृद्धि होने का उदाहरण देते हुए कहा कि भविष्य में सरकार द्वारा अपनी योजनाओं को पी.पी.पी. तथा बी.ओ.टी. के तहत लागू किया जाएगा। ऐसे में यह साफ माना जा रहा है कि हरियाणा की जनता को अगर इस प्रणाली पर सुविधाएं मिलती हैं तो जनता को कई तरह के करों की अदायगी करनी पड़ेगी। मुख्यमंत्री के अनुसार सुविधाएं हासिल करने की एवज में जनता द्वारा हर तरह के बकायों व करों की अदायगी करने से ही प्रदेश का वित्तीय ढांचा मजबूत हो सकता है।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि प्रदेश सरकार विकास तथा आर्थिक रूप से मजबूत के लिए साधनों के सृजन की तरफ पूरा ध्यान दे रही है। इसके बावजूद जनता को गैरजरूरी करों का सामना नहीं करने दिया जाएगा। इस मामले में राज्य सरकार द्वारा भविष्य में जरूरत पडऩे पर केंद्र सरकार से भी विशेष पैकेज के रूप में मदद ली जा सकती है। खट्टर ने कहा कि जो भी योजनाएं लागू की जा रही है उनका सीधा असर बजट पर पड़ेगा। ऐसे में हर योजना को लागू करते समय प्रदेश वासियों के हितों तथा सरकारी खजाने की ध्यान रखना जरूरी है।
Published on:
31 Oct 2016 05:04 pm
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