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जंग पर जाने से पहले… अरुण ‘इक्कीस’ खेत्रपाल की मां ने उनसे कही थी ये बात

Arun Khetarpal Story: अरुण खेत्रपाल भारतीय सेना के टैंक कमांडर थे। उन्होंने 10 पाकिस्तानी टैंकों को नष्ट किया। वे 1971 के युद्ध के प्रमुख नायकों में से एक थे। अरुण खेत्रपाल की बहादुरी की कहानी दिल्ली से शुरू होकर युद्ध भूमि में अमर हो गई। वे न केवल एक सैनिक थे, बल्कि युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा।

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मुंबई

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Rashi Sharma

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विवेक शुक्ला

Jan 02, 2026

Arun Khetarpal Story

शहीद अरुण ‘इक्कीस’ खेत्रपाल की शौर्यगाथा। (फोटो डिजाइन: पत्रिका)

Arun Khetarpal Story: आईआईटी दिल्ली के 70 पार कर गए पुराने बहुत से स्टूडेंट्स 'इक्कीस' फिल्म देख रहे हैं। उनमें प्रेम भुटानी भी हैं। वे आज जब 'इक्कीस' फिल्म देखने जा रहे थे तब उनके सामने भारत-पाकिस्तान के बीच 1971 की जंग की यादें चलचित्र की तरह से चल रही थीं। वे तब आईआईटी दिल्ली में पढ़ रहे थे। वहां उनके क्लासमेट मुकेश खेत्रपाल भी थे। मुकेश के बड़े भाई सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल के शौर्य की जानकारियां सबको मिल रही थीं। उन्हें याद है कि जब अरुण खेत्रपाल के रणभूमि में शहीद होने का समाचार आया तो आईआईटी दिल्ली के दर्जनों स्टूडेंट्स अरुण खेत्रपाल के राजधानी दिल्ली के नारायणा स्थित घर में गए थे। फिल्म 'इक्कीस' की कहानी सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल की वीरता पर आधारित है।

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