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जिले में जैविक खेती का क्रेज बढ़ा, 6 हजार किसान कर रहे

जिले के किसानों का जैविक खेती की ओर रूझान बढ़ा है। अब जिले में कई किसान पूरी तरह से जैविक खेती कर रहे हैं, वो खेतों से निकलने वाले अपशिष्ट व गोबर से वर्मी कंपोस्ट बनाकर ही खेतों में काम में ले रहे हैं

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जीवामृत तैयार करते देवीलाल गुर्जर

- तीन हजार हैक्टेयर में हो रही जैविक खेती

एक्सक्लूसिव

हरिसिंह गुर्जर

झालावाड़ जिले के किसानों का जैविक खेती की ओर रूझान बढ़ा है। अब जिले में कई किसान पूरी तरह से जैविक खेती कर रहे हैं, वो खेतों से निकलने वाले अपशिष्ट व गोबर से वर्मी कंपोस्ट बनाकर ही खेतों में काम में ले रहे हैं। वहीं राजस्थान सरकार भी अब जैविक व नेचुरल फार्मिंग के लिए अनुदान दे रही है। जिले में अभी दोनों योजनाओं के लिए करीब 6 हजार किसान तीन हजार हैक्टेयर भूमि में पूरी तरह से जैविक खेती में रूचि दिखा रहे हैं। जैविक किसान देवीलाल ने बताया कि आज के समय में लोग ज्यादा उत्पादन के चक्कर में रासायनिक खाद और दवाईयों का बहुत अधिक उपयोग खेती में करने लगे हैं। इससे उत्पादन तो भले ही ज्यादा मिल जाएगा,लेकिन खेती जहरीली होती जा रही है। वहीं रासायनिक उर्वरक और दवाईयों से होने वाली उपज हमारी सेहत के लिए भी खतरनाक साबित हो रही है। उसी को देखते हुए जैविक पद्धति से खेती करने की सोची है।

बजट में हुई थी घोषणा-

राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन एवं मुख्यमंत्री बजट घोषणा 2025-26 के अंतर्गत जिले में कुल 35 क्लस्टरों को प्राकृतिक खेती के लिए अनुदान दिया जाएगा। प्रत्येक क्लस्टर का क्षेत्रफल लगभग 50 हेक्टेयर होगा, जिसमें 125 कृषकों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। इन कृषकों को 0.4 हैक्टेयर (एकड़) क्षेत्र में प्राकृतिक खेती के लिए सहायता प्रदान की जा रही है।

जिले में ये कर रहे पूरी तरह से जैकि खेती-

जिले के धतुरिया निवासी जैविक किसान देवीलाल गुर्जर ने बताया कि वो 10 साल से पूरी तरह से साढ़े सात बीघा में जैविक खेती कर रहे हैं। उन्होने जैविक प्रमाणन संस्था रोको में भी अपना पंजीयन करवा रखा है। गुर्जर खरीफ में मक्का, सोयाबीन, उड़द, मूंग व रबी में गेहूं, चना की खेती करते हैं। इस समय सोना मोती किस्म के गेहूं लगा रखे हैं। किसान ने बताया कि आज के कैंसर, हार्ट अटैक सहित कई गंभीर बीमारियां पेस्टीसाइड व यूरिया के फसलों में अधिक प्रयोग करने से हो रही है। हमें हमारी सेहत सुधारना है तो जैविक खेती अपनानी होगी।

ऐसे करते है तैयार-

जैविक किसान देवी लाल गुर्जर उपचार के लिए कॉपर की पूर्ति के लिए गोमूत्र में तांबे का पत्र,अदरक 200 लीटर में 5 किलो आदि मिलाकर स्प्रे तैयार किया गया है। वहीं कीटनाशक बनाने के लिए 2 किलो नीम पत्ती, 2 किलो धतूरे की पत्ती, 2 किलो आक की पत्ती, हरी मिर्च 1 किलो 20 लीटर छाछ, 10 किलो ताजा गाय का गोबर, 150 लीटर गोमूत्र आदि से कीटनाशकबनाया जाता है। गुर्जर ने बताया कि गाय के गोबर में पांच प्रकार के तत्व होते है जिसमें फास्फोरस, पोटाश, अमोनियम सल्फेट, क्लोराइड कैल्शियम वहीं गोमूत्र में 16 प्रकार के तत्व रहते हैं जिसमें नाइट्रोजन, कैल्शियम फास्फोरस, पोटाश, अमोनियम सल्फेट आदि होते है जो फसलों में अंकुरण क्षमता बढ़ाता तथा इससे फसलों की बढ़वार भी अच्छी होती है।

जैविक बाडी लगाकर सुधार रहे सेहत-

जिले के बकानी कस्बा निवासी भंवरलाल कुशवाह पूरी तरह से जैविक खेती करते हैं। कुशवाह के पास जमीन कम है, लेकिन जो वो पूरी तरह से जैविक करते हैं। भंवरलाल के पास मात्र एक बीघा जमीन है। उसमें सब्जी की बाडी लगा रखी है, जिसमें गिलकी, मटर, टमाटर, भिंडी, आलू, गोभी, मैथी आदि पूरी तरह से जैविक करते हैं।

जैविक खेती के ये है प्रमुख फायदे-

-शुद्ध अनाज व सब्जियों को पकाने में कम समय लगता है

- कैंसर, हार्टअटैक जैसी कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है

- लगातार बंजर हो रही कृषि भूमि को बचाया जा सकता है

-जैविक खेती से फसल मित्र किटों को बचाया जा सकता है जो खेतों में कई तरह के

फैक्ट फाइल

- जिले में 1767 किसान जैविक खेती कर रहे।

- जिले में 1200 हैक्टेयर में जैविक खेती

- जिले में 35 कलस्टर में 4375 किसान नेचुरल फार्मिंग कर रहे।

- जिले में 1750 हैक्टेयर में नुचेरल फार्मिंग की जा रही है।

इतना दिया जा रहा अनुदान-

जिले में जैविक खेती के लिए एक किसान को 5000 रूपए का अनुदान प्रतिवर्ष तीन साल तक दिया जाता है। जिसमें किसान को जमीन के अनुपात में अनुदान दिया जाता है। किसान को वर्मी बेड आदि बनाकर अपने खेत को जैविक कर्न्वजन करना होता है। जिले में अभी 1767 किसान जैविक खेती कर रहे। वहीं नेचुरल फार्मिंग में प्रति किसान 4000 रुपए का आदान अनुदान दिया जा रहा है। जिसमें जीवामृत, बीजामृत आदि बनाने के सामान दिए जाते हैं। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के नोडल अधिकारी डॉ. चौथमल शर्मा ने बताया कि प्राकृतिक खेती का मुख्य उद्देश्य मिट्टी की सेहत सुधारना, जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन बढ़ाना और इनपुट लागत को कम करना है। इसमें पशुधन का समावेश, जैविक खाद, हरी खाद, बीजामृत, जीवामृत और नीमास्त्र जैसी प्राकृतिक तकनीकों का प्रयोग किया जाता है।

सरकार दे रही प्रोत्साहन-

रसायन से जो हिंसक खेती हो रही है। उससे और पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाया जा सकता है। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार प्रोत्साहित कर रही है। इसमें सभी उत्पाद गो-आधारित होंगे। इसका मुख्य उद्देश्य सुरक्षित एवं पोषक खाद्य उपलब्ध करना है। जिले में करीब 6 हजार से अधिक किसान जैविक खेती में रूचि दिखा रहे हैं।

कैलाश चन्द मीणा,संयुक्त निदेशक (कृषि विस्तार), झालावाड़।