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संजीव शर्मा,चंडीगढ़। हरियाणा में हालही में हुए जाट आरक्षण आंदोलन में मारे गए 30 व्यक्तियों में से सरकार ने नौ मृतकों को निर्दोष मान लिया है। सरकार ने नौ मृतकों के परिजनों को दस-दस लाख रुपए मुआवजा राशि जारी कर दी है। सरकार ने जहां अभी मृतकों के परिजनों एवं आश्रितों को सरकारी नौकरी दिए जाने संबंधी कोई फैसला नहीं लिया है वहीं अन्य 21 मृतकों के मामले की जांच चल रही है।
हरियाणा में 18 से 23 फरवरी तक हुए जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान उपद्रव में 30 लोगों की मौत हो गई थी। मृतकों में झज्जर जिले के 13, सोनीपत जिले के 8, रोहतक के पांच, जींद के दो, हिसार व कैथल का एक-एक व्यक्ति शामिल था। हरियाणा सरकार ने 24 फरवरी को जाटों को आरक्षण दिए जाने का ऐलान करके आंदोलन को समाप्त करवाया था। इस उठापटक के बीच हरियाणा के कृषि मंत्री ने आंदोलन के दौरान मारे गए व्यक्तियों के परिजनों को दस-दस लाख रूपए मुआवजा तथा आश्रितों को सरकारी नौकरी दिए जाने का ऐलान किया था।
कई तरह के विवादों के चलते हरियाणा सरकार अभी तक मृतकों के परिजनों को मुआवजा नहीं दे पाई थी। इसी दौरान गत रात्रि सरकार ने नौ मृतकों को निर्दोष मानते हुए उन्हें मुआवजा राशि जारी किए जाने के निर्देश जारी कर दिए। सूत्रों के अनुसार हरियाणा सरकार ने आज रोहतक जिले के चार, झज्जर जिले के दो, हिसार,सोनीपत व कैथल के एक-एक मृतक परिवार को दस-दस लाख रुपए की मुआवजा राशि जारी कर दी।
जिन लोगों को मुआवजा दिया गया हैं, उनमें रोहतक से रविंद्र, मनजीत, नितिन और प्रदीप के परिवार शामिल हैं। वहीं कैथल से पूरण, हिसार से मिंटू गुज्जर, सोनीपत से बिखू, झज्जर से श्याम और कृष्ण कुमार के परिजनों को भी मुआवजा दिया जा चुका है। विभागीय सूत्रों के अनुसार 21 मृतकों के मामले में निर्दोष होने संबंधी सरकार कोई फैसला नहीं कर सकी है। जिसके चलते अभी इन मृतकों को मुआवजा देने के संबंध में कोई फैसला नहीं लिया है। जिन परिवारों को मुआवजा राशि जारी की गई है उन्हें भी सरकारी नौकरी दिए जाने के मामले को अभी लंबित कर दिया है।
हरियाणा हाउसिंग बोर्ड के चेयरमैन एवं भाजपा प्रवक्ता जवाहर यादव ने कहा कि सरकार ने पूरी गहनता के साथ जांच के बाद यह फैसला लिया है। भविष्य में भी सरकार द्वारा सभी पहलूओं की जांच के बाद ही निर्णय किया जा रहा है।
कैसे माना निर्दोष सरकार नहीं कर रही खुलासा
जिन नौ परिवारों को मुआवजा राशि जारी की गई उनके मृतकों को निर्दोष तो मान लिया गया है, लेकिन इसका आधार क्या रहा है। इस मामले पर सरकार तथा आला अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। अपुष्ट सूत्रों के अनुसार सरकार ने यह मानक तय करने के लिए बकायदा पुलिस तथा सिविल प्रशासन के अधिकारियों की एक कमेटी का गठन किया था। जिसने निर्दोष व दोषी की परिभाषा तय की है। अधिकारिक रूप से इस मुद्दे पर कोई भी बोलने को तैयार नहीं है। अलबत्ता कहा जा रहा है कि जिन लोगों की मौत पुलिस की गोली लगने से हुई है उन्हें सरकार निर्दोष मान रही है अथवा जिन लोगों की मौत दंगाईयों की गोली लगने से हुई है उन्हें दोषी माना जा रहा है।
21 मृतकों के केस संदेह के दायरे में
सरकारी सूत्रों की मानें तो जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान मारे गए कुल 30 मृतकों में से 21 मृतकों का केस संदेह के दायरे में है। जिसके चलते सरकार अब सहायता राशि जारी नहीं करेगी। जाट संगठनों एवं प्रदेश के कुछ जाट नेताओं के दबाव के चलते आज नौ मृतकों के आश्रितों को सहायता राशि जारी की गई है।
Published on:
04 May 2016 12:49 pm
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