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हरियाणा में आपूर्ति प्रणाली की कमजोरी सेे बिजली का पूरा उपयोग नहीं

हरियाणा में आपूर्ति प्रणाली मजबूत नहीं होने से सरप्लस होने के बावजूद बिजली दे नहीं पाते

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(राजेन्द्र सिंह जादोन की रिपोर्ट)
चंडीगढ। हरियाणा में वर्ष 2014 से सत्तारूढ भाजपा बिजली की बचत तो कर रही है लेकिन आपूर्ति प्रणाली मजबूत नहीं होने से इसका पूरा उपयोग नहीं कर पा रही। हरियाणा के पावर मंत्री कृृष्ण लाल पवार ने यह खुलासा किया। उन्होंने कहा कि आपूर्ति प्रणाली मजबूत नहीं होने से सरप्लस होने के बावजूद बिजली दे नहीं पाते। इसीलिए डिस्कॉम के जरिए सब स्टेशन अपग्रेड किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट््टर भी आपूर्ति प्रणाली मजबूत नहीं होने की बात कहते रहे हैं। पंवार ने बताया कि केन्द्र सरकार ने 31 अक्टूबर 2018 तक ढांचागत विकास पूरा करने वाले राज्यों को 50 करोड रुपए की सहायता और 50 लाख रुपए सम्बन्धित अफसरों को पुरस्कार में देने का भरोसा दिया है।

238 मेगावाट बिजली की बचत


हालांकि पंवार ने हरियाणा में बिजली की बचत किए जाने की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 1 करोड़ 51 लाख बल्ब, ट््यूब और पंखे बांटे गए। इससे 238 मेगावाट बिजली की बचत हुई है। लाइन लॉसेस भी 34 फीसदी से घटाकर 20 फीसदी कर लिए गए हंै। उन्होंने कहा कि हरियाणा में 51 हजार गांवों और ढाणियों में बिजली नहीं थी। इनमें से 40 हजार को बिजली दी जा चुकी है और शेष 11 हजार को दिसम्बर 2018 तक बिजली आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी। हरियाणा के कोयला आधारित थर्मल प्लांट में कोयले की कमी के बारे में पंवार ने कहा कि हाल में शिमला में प्रदेश के पावर मंत्रियों के सम्मेलन में केन्द्रीय पावर मंत्री आरके सिंह ने पर्याप्त कोयला आपूर्ति का आश्वासन दिया है।

2100 गांवों में 24 घंटे बिजली


पंवार ने बताया कि हरियाणा सरकार अभी 2100 गांवों में 24 घंटे बिजली दे रही है। इनके अलावा 186 गांवों में 15 से 21 घंटे बिजली दी जा रही है। अभी छह जिलों में 24 घंटे बिजली दी जा रही है और आगामी 15 अगस्त तक तीन और जिलों में 24 घंटे बिजली दी जाएगी। पंवार ने बताया कि पानीपत में 11 हजार स्मार्ट मीटर लगाकर पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। गुरूग्राम में स्मार्ट मीटर योजना के लिए केन्द्र सरकार ने 780 करोड रूपए मंजूर किए है। इनमें से पहली किस्त के 273 करोड रूपए मिल गए है। उन्होंने कहा कि हरियाणा ने अन्य राज्यों से 600 मेगावाट का पावर बैंक का एमओयू किया है। इसके तहत जरूरत पर इन राज्यों से बिजली लेंगे और सरप्लस होने पर इन्हें बिजली दी जाएगी।