
Robert Vadra
संजीव शर्मा,चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने रॉबर्ट वाड्रा-डीएलएफ लैंड डील की जांच करने वाले ढींगरा आयोग को भले ही आठ सप्ताह का समय दे दिया है लेकिन दिनभर सचिवालय में इस बात को लेकर चर्चा जोरों पर रही कि आखिर आधार पर ढींगरा ने समय बढ़ाने की मांग की है और सरकार ने उसे आनन फानन में स्वीकृति भी प्रदान कर दी।
जस्टिस ढींगरा द्वारा हरियाणा के मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र पर अगर गौर किया जाए तो उन्होंने साफ किया है कि वह अपनी जांच पूरी कर चुके थे और रिपोर्ट तैयार थी। बृहस्पतिवार को उन्होंने यह रिपोर्ट सरकार को सौंपने की तैयारी भी कर ली थी। इसी दौरान एक व्यक्ति उनके पास आया और भारी मात्रा में सेल डीड का एक बंडल उन्हें दे दिया।
जस्टिस ढींगरा के अनुसार पत्र देने वाले व्यक्ति का दावा था कि इन दस्तावेजों के माध्यम से लाईसेंसी का लाभ मिला है। इस तर्क के आधार पर जस्टिस ढींगरा को संदेह हुआ और उन्होंने प्रांरभिक जांच में इस बात का आभास हुआ कि इन दस्तावेजों पर गंभीरता से विचार करते हुए जांच करने की जरूरत है।
ढींगरा ने उक्त व्यक्ति द्वारा दिए गए सेल डीड के दस्तावेजों की जांच करने का तर्क देते हुए समय मांगा है। दिलचस्प बात यह है कि जस्टिस ढींगरा ने अपने इस पत्र सेल डीड का बंडल थमाने वाले व्यक्ति का कोई उल्लेख नहीं किया है। ऐसे में ढींगरा द्वारा दिए गए तर्क को लेकर भी कई तरह के सवाल उठने लगे हैं।
जस्टिस ढींगरा को सेल डीड की कापियां देने वाले व्यक्ति ने जिस आधार पर दावा किया है उसके तहत यह माना जा रहा है कि घटनाक्रम को अंतिम समय में नया मोड़ देने वाला व्यक्ति इस पूरे घटनाक्रम का हिस्सा रही किसी अहम कड़ी द्वारा भेजा गया हो सकता है। दूसरा दस्तावेज देने वाले व्यक्ति की पहचान गुप्त रखे जाने से विपक्षी दलों ने आज सरकार को नए मुद्दे पर घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर का तर्क है कि आयोग का कार्यकाल बढ़ाए जाने से कुछ नहीं मिलेगा। दरअसल सरकार वाड्रा व अन्य कांग्रेसी नेताओं को झूठा फंसाने के लिए कोई साजिश रचने की तैयारी में है।
कांग्रेस ने पहले क्यों नहीं जताई आपत्ति: खट्टर
ढींगरा आयोग का कार्यकाल बढ़ाए जाने के मुद्दे लेकर उठे विवाद के चलते हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि गुडग़ांव में जारी किए गए भूमि उपयोग परिवर्तन (सीएलयू) की जांच के लिए गठित न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) एस.एन.ढींगरा आयोग की कार्यावधि बढ़ाए जाने के मुद्दे पर कांगे्रस पार्टी के नेताओं द्वारा उठाए जा रहे सवालों से प्रतीत होता है कि दाल में कुछ काला है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ढींगरा आयोग का गठन एक वर्ष पहले किया गया था तब कांगे्रस को कोई आपत्ति नहीं थी।
इससे पूर्व भी इस आयोग का कार्यकाल बढ़ाया गया था और स्वीकृति को 10 दिन बाद अधिसूचित किया गया था। उस समय भी किसी को आपत्ति नहीं थी। अब आयोग ने छ: सप्ताह का समय बढ़़ाने की मांग की थी परन्तु सरकार ने दो माह का समय बढ़ाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि तथ्यों की सही जानकारी तो रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगी। आयोग की रिपोर्ट आने से पहले ही सवाल उठाना इस बात की ओर इशारा करता है दाल में कुछ काला है।
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