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दिनकरण को 2 और विधायकों का समर्थन

मुख्यमंत्री एडपाड़ी पलनीस्वामी की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। दिनकरण समर्थक १९ विधायकों ने उनको हटाने की अर्जी राज्यपाल को दे रखी है

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 TTV Dinakaran

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चेन्नई. मुख्यमंत्री एडपाड़ी पलनीस्वामी की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। दिनकरण समर्थक १९ विधायकों ने उनको हटाने की अर्जी राज्यपाल को दे रखी है। विपक्षी दल भी उनसे बहुमत साबित करने की मांग कर चुके हैं। इस बीच दो और विधायकों ने टीटीवी दिनकरण से भेंटकर उनको समर्थन देने की घोषणा की। इस तरह उनका संख्या बल घटता जा रहा है। प्रभारी राज्यपाल विद्यासागर राव चेन्नई आ चुके हैं।इसलिए सियासी गतिविधियां तेज होने की उम्मीद है।


इस बीच एआईएडीएमके विधायक रत्नसभापति और कलैसेल्वन ने दिनकरण के प्रति अपनी निष्ठा जाहिर की। रत्नसभापति ने पत्रकारों से वार्ता में पूछा कि पार्टी महासचिव वी. के. शशिकला को हटाए जाने की वजह बताई जाए। इन दो विधायकों के समर्थन के साथ दिनकरण खेमे में २१ विधायक हो गए हैं। कुछ अन्य विधायकों के भी पाला बदलने की उम्मीद है। इस बदलाव को लेकर मुख्यमंत्री ईपीएस और उपमुख्यमंत्री ओपीएस ने अन्य मंत्रियों के साथ चर्चा की है।


ज्ञातव्य है कि विधानसभा में एआईएडीएमके विधायकों की कुल संख्या १३४ हैं जिनमें से २१ दिनकरण के साथ हैं ऐसे में ईपीएस के पास ११३ विधायक ही शेष रहते हैं जबकि उनको बहुमत साबित करने के लिए ११७ विधायक चाहिए। अगर राज्यपाल से मुख्यमंत्री को आदेश होता है कि वे विधानसभा में संख्याबल साबित करें तो फिर सरकार के गिरने की संभावना है।


उधर, शशिकला के भाई दिवाकरण का भी दावा है कि उनके साथ ८ मंत्री और ६० विधायक हैं और यह संख्या निरंतर बढ़ेगी। वे स्पीकर पी. धनपाल को अगला मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं। बहरहाल, राज्य के मुख्य शासन सचेतक राजेंद्रन की अर्जी पर स्पीकर ने दिनकरण गुट के १९ विधायकों को नोटिस भेजा है। राजेंद्रन ने सीएम के प्रति अविश्वास जताने पर इनको अयोग्य घोषित किए जाने की गुहार लगाई थी। दूसरी ओर विधानसभा में गुटखा लाने के मामले में नेता प्रतिपक्ष एम. के. स्टालिन समेत २० विधायकों पर विशेषाधिकार हनन समिति को फैसला करना है। अगर वह इनको निलंबित करने का आदेश देती है और उस अवधि में विधानसभा में विश्वासमत पेश होता है तो शायद मुख्यमंत्री अपनी लाज बचा सकते हैं।


त्याग और द्रोह के बीच हो रहा संघर्ष : दिनकरण
टीटीवी दिनकरण ने शनिवार को मौजूदा राजनीतिक बदलाव पर टिप्पणी की कि पार्टी के प्रति त्याग और द्रोह की भावना रखने वालों के बीच संघर्ष चल रहा है। यहां पत्रकारों से वार्ता में दिनकरण बोले कि वे बुखारग्रस्त थे और उनका गला अभी भी ठीक नहीं हुआ है। मीडिया से मिले भी एक सप्ताह से अधिक का समय हो चुका है। वे तिरुपुर में हो रही एक शादी में शरीक होने जा रहे हैं। चिकित्सकों की सलाह है कि वे अधिक बात नहीं करें।


पत्रकारों ने दिनकरण से पूछा कि उनके समर्थक १९ विधायकों को स्पीकर द्वारा नोटिस भेजा जाना क्या उनको धमकाने की कोशिश है? इस पर उनकी प्रतिक्रिया थी कि भगवान के अलावा उनको कोई नहीं डरा सकता। भगवान और सच्चाई से वे बंधे हैं। आज जो त्याग और द्रोह की जो जंग छिड़ी है उसके सेनापति के तौर पर १९ विधायक पुदुचेरी गए हैं। वे इसलिए नहीं गए हैं कि उनको अच्छी बोली देकर खरीद लिया जाएगा बल्कि उनका इरादा जनता की इस लोकप्रिय पार्टी को नि:स्वार्थ भावना से बचाना है। पूरा भारतीय उपमहाद्वीप तमिलनाडु की सियासत पर नजर गड़ाए हुए है।

माया तो पाताल लोक में भी पहुंच सकती है की टिप्पणी पर दिनकरण का कहना था कि सभी १९ विधायकों की मंशा है कि पार्टी को सुरक्षित किया जाए। उन तक निश्चित तौर पर पैसा नहीं पहुंचेगा। इसका कारण यह है कि अगर आज वे उनके साथ होते तो उनको कौनसा पद मिल सकता था इसे वे भली-भांति जानते हैं। लेकिन जो उनके साथ वो धर्म का साथ दे रहे हैं। दिनकरण ने पुदुचेरी के रिसोर्ट में ठहरे विधायकों की वकालत की कि वे किसी से डरकर वहां जाकर नहीं रुके हैं। वे लोगों तक यह संदेश पहुंचाना चाहते हैं कि उनको पार्टी की फिक्र है और महासचिव ही एआईएडीएमके को सही दिशा में आगे लेकर जा सकती है। उनको इंसाफ अवश्य मिलेगा। हमें पूरी उम्मीद है कि राज्यपाल उचित फैसला करेंगे। दिनकरण ने कहा कि पार्टी की हिफाजत के लिए ही वे उन विधायकों के साथ में हैं।