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3,032 छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों ने ‘वंदे मातरम्’ की विशाल मानव आकृति बनाया

कट्टानकुलातुर. एसआरएम इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी ने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर एक अद्वितीय विश्व रिकॉर्ड प्रयास का आयोजन किया। यह पहल भारत के प्रधानमंत्री के विजन के अनुरूप थी और संस्थापक कुलाधिपति डॉ. टी. आर. पारिवेन्धर के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुई। इस विश्व रिकॉर्ड प्रयास के तहत 3,032 प्रतिभागियों जिनमें छात्र, शिक्षक एवं गैर-शिक्षण कर्मचारी शामिल थे ने मिलकर “वेंद मातरम” शब्दों की सबसे बड़ी मानव आकृति का निर्माण किया। प्रतिभागियों ने तिरंगे के रंगों का पोशाक पहनकर एकता, राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रीय गौरव का सशक्त संदेश दिया। यह आयोजन मंगलवार को वर्ल्ड रिकॉर्ड यूनियन के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर एसआरएमआईएसटी के रजिस्ट्रार डॉ. एस. पोन्नुसामी ने कहा यह विश्व रिकॉर्ड प्रयास एसआरएमआईएसटी समुदाय की सामूहिक ऊर्जा और समर्पण का प्रतीक है।

‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने का स्मरण किया

इस मानव संरचना के माध्यम से हमने अनुशासन, सहभागिता और साझा जिम्मेदारी के भाव के साथ ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने का स्मरण किया है।”तमिल पेरायम, एसआरएमआईएसटी के प्रमुख डॉ. करु नागरासन ने कहा वंदे मातरम् भारत की सांस्कृतिक और भाषायी धरोहर में गहराई से रचा-बसा है। इस प्रयास के माध्यम से हम इसकी 150 वर्षों की विरासत को सम्मान देते हुए सामूहिक मानवीय सहभागिता से उसे अभिव्यक्त कर रहे हैं।

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