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हिन्दी व भारतीय भाषाओं को दिया जा रहा बढ़ावा : सुषमा स्वराज

दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा, मद्रास का 82वां दीक्षांत समारोह

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82nd convocation of Dakshin Bharat Hindi Prachar Sabha

हिन्दी व भारतीय भाषाओं को दिया जा रहा बढ़ावा : सुषमा स्वराज

चेन्नई. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का कहना है कि केंद्र सरकार हिन्दी व अन्य भारतीय भाषाओं को समान रूप से बढ़ावा दे रही है। मौजूदा सरकार ने इस क्षेत्र में जितना कार्य किया है उतना पहले कभी नहीं हुआ। विदेश मंत्री बतौर मुख्य अतिथि शनिवार को टी. नगर स्थित दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा, मद्रास के ८२वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रही थी।

उन्होंने कहा कि पहले कैबिनेट की सभी बैठकें अंग्रेजी में संचालित की जाती थी लेकिन अब सभी बैठकें हिन्दी में होती हैं। विदेश मंत्रालय में भी पहले अंग्रेजी का एकाधिकार था लेकिन अब सभी अधिकारी हिन्दी में बात करते हैं। स्वर्गीय पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की परम्परा को जारी रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र में २०१५ से २०१८ तक हिन्दी में भाषण दिया। इसी कारण विश्व में हिन्दी के प्रति आकर्षण बढ़ता जा रहा है। अनेक देशों से हिन्दी की पीठ स्थापित करने की मांग आ रही है।

सुषमा स्वराज ने जानकारी दी कि केंद्र सरकार ने संयुक्त राष्ट्र संघ के साथ एक करार किया गया है जिसके तहत सप्ताह में एक बार यूएन में हिन्दी में समाचार भी प्रसारित किया जा रहा है। यूएन ने हिन्दी में सोशल नेटवर्किंग की भी सुविधा दी है। विदेश मंत्रालय भारत एक परिचय कार्यक्रम के तहत प्रादेशिक भाषाओं के विकास में भी सक्रिय है। विदेश नीति भी अंग्रेजी की जकड़ से बाहर निकली है। वर्तमान युग संचार और मीडिया का है जिसमें हिन्दी तथा प्रादेशिक भाषाओं का बोलबाला है इस वजह से रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ी हैं। विदेश मंत्रालय ने इसी कड़ी में अटल भाषांतर योजना शुरू की है जिसके तहत हिन्दी से संयुक्त राष्ट्र की सभी भाषाओं के भाषांतरकार लिए जाएंगे।

उपाधि प्राप्त करने वालों को विदेश मंत्री ने सुझाव दिया कि वे हिन्दी केवल उपाधि पाने के लिए नहीं पढ़ें। जो भाषा केवल उपाधि के लिए पढ़ी जाती है उसका महत्व कम होता है और कालांतर में हम उसे भूल जाते हैं। हिन्दी और भारतीय भाषाएं भारतीयता को केंद्र में रखकर पूरे देश को एक बना सकती है।

मुख्य अतिथि ने सांकेतिक रूप में सभा के सभी दक्षिणी राज्यों के ३२१९९ विद्यार्थियों को विशारद, २२ हजार ६ विद्यार्थियों को राष्ट्रभाषा प्रवीण, पीजी विभाग २३३७ (दूरस्थ) और १७९९ (नियमित) विद्यार्थियों को पदवियां दीं। चारों केंद्र में प्रथम स्थान पाने वाले विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक दिया गया। उन्होंने चारों दक्षिणी भाषाओं के साहित्यकारों व वरिष्ठ हिन्दी प्रचारकों का सम्मान तथा एक पुस्तक का विमोचन किया। सभा के कुलाधिपति सेवानिवृत्त न्यायाधीश शिवराज वी. पाटील ने अध्यक्षीय भाषण दिया। प्रधान सचिव एस. जयराज ने सभा की रिपोर्ट पेश की। कोषाध्यक्ष सी. एन. अण्णामलै ने केंद्रीय मंत्रियों के शुभकामना संदेश पढ़े। इस अवसर पर कुलपति एच. हनुमंतप्पा, समकुलपति डा. आर. नीरलकट्टी, उच्च शिक्षा एवं शोध संस्थान के रजिस्ट्रार प्रदीप शर्मा, शिक्षा परिषद के अध्यक्ष एस. पार्थसारथी, भाजपा के राज्यसभा सांसद एल. गणेशन और प्रदेशाध्यक्ष तमिलइसै सौंदरराजन के अलावा परिजनों के साथ बड़ी संख्या में आए विद्यार्थी उपस्थित थे।