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तिरुपुर की एक शिक्षिका ने सड़क पर घूमने वाले 25 बच्चों का बदला जीवन

-कड़ी मसक्कत के बाद भेजा स्कूल

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तिरुपुर की एक शिक्षिका ने सड़क पर घूमने वाले 25 बच्चों का बदला जीवन

तिरुपुर की एक शिक्षिका ने सड़क पर घूमने वाले 25 बच्चों का बदला जीवन


-नियमित 5 से 7 बजे लेती हैं ट्यूशन
तिरुपुर. किसी कारण से स्कूल छोड़कर पुराने फटे कपड़ों में सड़कों पर घूमने वाले बच्चों की 47 वर्षीय तहासुन्निसा बेगन नामक शिक्षिका ने शिक्षा के करीब लाकर उनका जीवन ही बदल दिया। सड़कों पर घूमते देख महिला ने उनको शिक्षा के करीब लाने का फैसला किया और उस पर अमल कर सभी को शिक्षा से जोड़ दिया। अन्ना राव सर्कल से कुछ ही दूरी पर स्थित मालवाड़ी गुंडम धारा से सटी कंक्रीट की इमारतों के बीच कुछ फूस के घर हैं जहां 38 एसटी परिवार रहते हैं, जो बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।

इन बच्चों के अभिभावक दिहाड़ी मजदूरी कर गुजर बसर करते हैं। इस कारण उनके बच्चे नियमित स्कूल नहीं जा पा रहे थे। बातचीत के दौरान बेगम ने बताया कि डेढ़ साल पहले इन बच्चों के घरों में प्रतिदिन इंटरेक्टिव कक्षाएं लेना शुरू किया था। उसके बाद से दैनिक आधार पर बेगम और उनकी कुछ महिला साथियों द्वारा कॉलोनी में ही बच्चों के लिए ट्यूशन कक्षाओं का संचालन किया जाता है।


-कोरोना ने खराब स्थिति को और भी किया बदतर
इन बच्चों के अभिभावकों की स्थिति पहले से खराब है, लेकिन कोरोना महामारी ने उस खराब स्थिति को और भी बदतर बना दिया। कोरोना में आजीविका के साधन खत्म हुए और बचे हुए पैसे भी छूमंतर हो गए। शुरूआती दिनों में यह अजीब था, क्योंकि बच्चों को पढ़ाने और शिक्षित करने की बात करने पर कई माता पिता और बच्चों ने इस विचार को ठुकरा दिया।


-लॉकडाउन के दौरान दिया भोजन
उन्होंने बताया कि बच्चों के करीब आने के लिए लॉकडाउन के दौरान मैंने बच्चों में भोजन समेत अन्य जरूरी सामग्री का वितरण किया। बच्चों में कई कुपोषित हैं और उनमें मौखिक व बुनियादी स्वच्छता की कमी थी। इस प्रकार से उनका मूल्य विषय ज्ञान शून्य था। इसलिए मैंने बच्चों में टूथपेस्ट व ब्रश का वितरण किया और उनका जन्मदिन भी मनाती थी। विशेष अवसरों पर उन्हें अपनी कक्षाओं में बैठने और सुनने के लिए कपड़े भी भेंट करती थी। इस प्रकार से 3 से 8 वर्ष के बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। उनको भाषाओं का ज्ञान देकर कक्षा में बैठने के लिए उत्साहित करती थी। अब सभी बच्चे पास के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई करने जाने लगे हैं।


-बच्चों ने तेजी से की प्रगति
पोलाम्मा नामक एक स्थानीय महिला ने बताया कि बेगम और उनकी सहयोगियों की मदद से बच्चों में तेजी से प्रगति हुई। प्रत्येक रविवार को बेगम द्वारा बच्चों के लिए योग और ध्यान का आयोजन किया जाता है। बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए बेगम ने समान विचारधारा वाले लोगों से अनुरोध किया है कि उनके समूह में शामिल होकर बच्चों को विज्ञान पढ़ाएं।