
बीती उम्र लौटकर नहीं आती
चेन्नई. ताम्बरम जैन स्थानक में विराजित साध्वी धर्मलता ने कहा कि मरुधर की वीरमाता ने जिस पुत्र को जन्म दिया वह कर्नाटक गजकेशरी नाम से प्रसिद्ध हुआ। बिड़लाग्राम में पूनमचंद ललवानी और माता धुलीबाई के घर इनका जन्म हुआ। इसके साथ ही घर में अच्छे कामों का श्रीगणेश होने लगा। इसलिए उनका नाम गणेशमल रखा गया। माता-पिता और छोटे भाई की मृत्यु के बाद उन्होंने प्रेमचंद से संयम की दीक्षा ली। वे कई भाषाओं के जानकार थे और उनका लक्ष्य खादी प्रचार, सम्यकत्व का प्रतिबोध, धर्म और गौशालाओं की स्थापना करना था। वे कहते थे जाग्रत बनो, बीती उम्र लौटकर नहीं आएगी। चुंबकीय आकर्षण, स्पष्टवादिता, प्रमाद रहित, जिनवाणी प्रचार उनकी विशेषता थी।
साध्वी अपूर्वा ने कहा कि गुरुदेव का ज्ञान सागर की तरह गहरा और जीवन आकाश की तरह उच्च था। वे सरल स्वभावी, मधुरवाणी, संयम के प्रति वफादार और दोषों से कोसों दूर थे। उनका पुण्य धरातल से आकाश तक, श्मशान से उद्यान तक, नर्क से स्वर्ग की ओर ले जाने वाला था। इस अवसर पर सामूहिक आनुपूर्वी जाप और एकासन का जाप हुआ। इसमें खेमचंद विजयराज गांधी और बंशीलाल गुगलिया का सहयोग रहा। नीलम गांधी, चंदमल मुणोत, पारसमल भलगट, सुरेश गुंदेचा भी इस अवसर पर उपस्थित थे। साध्वी अपूर्वा ने कहा कि गुरुदेव का ज्ञान सागर की तरह गहरा और जीवन आकाश की तरह उच्च था। वे सरल स्वभावी, मधुरवाणी, संयम के प्रति वफादार और दोषों से कोसों दूर थे। उनका पुण्य धरातल से आकाश तक, श्मशान से उद्यान तक, नर्क से स्वर्ग की ओर ले जाने वाला था। इस अवसर पर सामूहिक आनुपूर्वी जाप और एकासन का जाप हुआ। इसमें खेमचंद विजयराज गांधी और बंशीलाल गुगलिया का सहयोग रहा। नीलम गांधी, चंदमल मुणोत, पारसमल भलगट, सुरेश गुंदेचा भी इस अवसर पर उपस्थित थे। इस अवसर पर सामूहिक आनुपूर्वी जाप और एकासन का जाप हुआ। इसमें खेमचंद विजयराज गांधी और बंशीलाल गुगलिया का सहयोग रहा। नीलम गांधी, चंदमल मुणोत, पारसमल भलगट, सुरेश गुंदेचा भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
Published on:
14 Nov 2018 12:26 pm
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